उन्नाव। अब भविष्य में लाइसेंसधारक दुकानदार साफ्टवेयर के माध्यम से खाद बेच सकेंगे। कृषि विभाग ने ई-पॉस मशीन के विकल्प के तौर पर यह व्यवस्था शुरू की है। इससे खाद का सारा ब्योरा भी कंप्यूटर पर दर्ज हो जाएगा। साथ ही डीएपी व यूरिया बेचने में भी दुकानदार को आसानी होगी।
जनपद में 167 साधन सहकारी समितियों, 600 प्राइवेट दुकानों, 55 एग्री जंक्शन सेंटर और इफ्को के 4 सेंटरों से किसानों को डीएपी व यूरिया की बिक्री की जाती है। कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ में 40 हजार एमटी यूरिया और रबी सीजन में 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत पड़ती है। अभी तक दुकानदारों को ई-पॉस मशीन के माध्यम से खाद की बिक्री करने का आदेश है। पूर्व में कृषि विभाग ने हर दुकानदार को ई-पॉस मशीन उपलब्ध कराई थी।
शुरुआत में कुछ समय तक तो मशीनें ठीक चली लेकिन छह माह बाद भी खराब होने लगी। वर्तमान समय में करीब 50 मशीनें खराब पड़ी हैं। किसी में बैटरी की दिक्कत है तो किसी में सर्वर की समस्या है। ई-पॉस मशीन की कंपनी के इंजीनियर मरम्मत के नाम पर खानापूरी कर रहे हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए अब कृषि विभाग ने ई-पॉस के विकल्प के रूप में साफ्टवेयर तैयार कराया है। दुकानदार विभाग द्वारा बनाए गए साफ्टवेयर के माध्यम से भी खाद का वितरण कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने कंप्यूटर में यह साफ्टवेयर लोड करना होगा। साफ्टवेयर dbt.nic.in से डाउनलोड किया जा सकता है।
अंगूठे के निशान के लिए अलग से मिलेगा स्कैनर
अभी दुकानदार किसान को खाद देने से पहले ई-पॉस मशीन में उसके अंगूठे का निशान लेते हैं। साथ ही आधार नंबर फीड करते हैं। साफ्टवेयर में व्यवस्था बदली होगी। इसमें किसान का पूरा नाम, पता और आधार नंबर के साथ खाद की मात्रा और खेती का नंबर भी भरना होगा। वहीं अंगूठे के निशान के लिए दुकानदारों को अलग से स्कैनर दिए जाएंगे। इफ्को के एरिया मैनेजर मानवेंद्र सिंह ने बताया कि स्कैनर के लिए कृषि विभाग से ऐसे दुकानदारों की सूची कृषि मंत्रालय को उपलब्ध कराई जाएगी। जो ई-पॉस के स्थान पर यह विकल्प डाउनलोड कर लेंगे।
दुकानदारों को खाद बेचने में मिलेगी सहूलियत
कृषि विभाग के इस साफ्टवेयर से दुकानदारों को खाद बेचने में सहूलियत मिलेगी। ई-पॉस से आने वाली दिक्कतों से निजात मिलेगी। इसमें मरम्मत जैसे दिक्कतें भी नहीं आएंगी।
कुलदीप मिश्रा, जिला कृषि अधिकारी उन्नाव।