शहर के स्टेशन रोड की कपड़ा मार्केट में पसरा सन्नाटा
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नोट बंदी और रुपयों की निकासी की सीमा तय होने से जिले का औद्योगिक क्षेत्र चरमरा गया है। स्थितियां सामान्य होने में देर हो रही है उद्यमियों की चिंता बढ़ती जा रही है। जिले के तीन औद्योगिक क्षेत्र दहीचौकी साइट-1 व साइट-2 के अलावा अकरमपुर और बंथर में पांच सैकड़ा से अधिक छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। इन उद्योगों का मासिक कारोबार 700 करोड़ रुपये था लेकिन नोटों की किल्लत और बाजार में मांग कम होने से कारोबार घटकर ढाई से तीन सौ करोड़ पर अटक गया है।
आने वाले दिनों में नगदी की कमी दूर न होने पर हालात और बदतर होने की आशंका को लेकर उद्यमी परेशान हैं। कई फैक्ट्रियों में तालाबंदी के हालत बन गए तो कई में उत्पादन आधा रह गया है। नगदी के अभाव में कच्चे माल की खरीद, भाड़ा और मजदूरी के भुगतान में दिक्कत हो रही है। कई फैक्ट्री मालिकों ने अपने अधिकांश मजदूरों को छुट्टी दे दी है। इससे श्रमिकों के सामने पेट पालने की समस्या पैदा हो गई है।
पीएम का कदम सही पर प्रबंध नहीं- आईआईए चेयरमैन
आईआईए (इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) के अध्यक्ष एके अग्रवाल ने प्रधामंत्री के इस कदम को सही लेकिन प्रबंधन को फेल बताया। उनका कहना है कि सरकार को इंडस्ट्रीज के लिए विड्राल पावर बढ़ाना होगा वर्ना उद्योग चौपट हो जाएंगे। सबसे अधिक दिक्कत डेली पेमेंट में हो रही हैं। न तो माल भाड़ा चुकाने के लिए नगदी है न मजदूरी के लिए। नगदी की कमी से पिछले दिनों एक पेपर मिल में ताला बंदी हो चुकी है। राइस मिल, फ्लोर मिल, केमिकल और टेक्सटाइल में काम कम हो गया है।
इस वित्तीय वर्ष में उद्योगों की स्थिति सामान्य होने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। जब तक करेंसी की किल्लत खत्म होगी तो विधानसभा चुनाव की अधिसूचना लग जाएगी। सरकारी सप्लाई बंद हो जाएगी। उद्यमियों के अन्य जरूरी काम भी नहीं हो पाएंगे क्योंकि पूरी सरकारी मशीनरी चुनाव में व्यस्त हो जाएगी।