उन्नाव। जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद भी जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में इसकी जांच की सुविधा नहीं है। मरीज को कानपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। जेडी डा. जेके महेश्वरी ने अधिकारियों को फटकार लगाई। जिला पुरुष अस्पताल के अलावा महिला अस्पताल एवं सीएचसी व पीएचसी में भी डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
डेंगू को लेकर प्रदेश सरकार के अलर्ट करने के बाद शुक्रवार को जेडी डा. जेके महेश्वरी सीएमओ कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान जिले में अभी तक मिले डेंगू के 29 मरीजों की जांच रिपोर्ट देखी। उसमें कोई भी रिपोर्ट जिले स्तर से भेजी नहीं मिली। रिपोर्ट भेजना तो दूर यहां डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों की जांच तक नहीं पाई। यह हाल तब है, जब जिले में डेंगू की जांच करने के लिए किट मौजूद होने के साथ ही लैब टेक्नीशियन हैं। इस पर जेडी ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और निर्देश दिए कि डेंगू के मरीजों की जांच जिला अस्पताल के पुरुष व महिला दोनाें अस्पतालों में की जाए। इसके अलावा सीएचसी, पीएचसी पर भी जांच हो। फीवर की मरीजों के लिए हेल्प डेस्क बनाई जाए। उस डेस्क में जानकारों को लगाया जाए। जहां पर जांच किट नहीं हैं वहां रोगी कल्याण समिति के बजट से पैसा निकालकर किट मंगाई जाए। इस दौरान सीएमओ डा. भूपेंद्रनाथ श्रीवास्तव, सीएमएस डा. एसपी चौधरी, डा. सरोज श्रीवास्तव के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
डेंगू की चपेट में आ रहे पुलिस कर्मी
जेडी डा. जेके महेश्वरी ने बताया कि पुलिस कर्मियों में डेंगू अधिक हो रहा है। इसका कारण है कि कोतवाली व थानों के परिसर की साफ-सफाई नहीं कराई जाती। इससे वहां खड़ी गाड़ियों व अन्य वस्तुआें में पानी भरा रहता है। पानी भरा होने से उसमें डेंगू के लार्वा पैदा होते हैं। पुलिस कर्मी जब परिसर में खड़े होते हैं तो वह मच्छर उन्हें काट लेता है। इससे इनमें सबसे अधिक डेंगू फैल रहा है।