सफीपुर विकासखंड के महमूदपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2013 में कीड़ा युक्त खाना खाने से 30 से अधिक बच्चे बीमार हुए थे। जुलाई 2015 में हसनगंज तहसील के सुंदरपुर में प्राथमिक स्कूल में एमडीएम बनाने के दौरान खाने में छिपकली गिर गई थी। भोजन करने के बाद 72 बच्चे बीमार हो गए थे।
बच्चों को नवाबगंज सीएचसी में भर्ती कराया गया था। तत्कालीन बीएसए डा. मुकेश कुमार सिंह ने घटना के बाद दो शिक्षामित्रों व एक सहायक टीचर पर निलंबन की कार्रवाई की थी। इसके बाद लखनऊ से आई जांच टीम ने जिले के सभी स्कूलों में प्रतिदिन एमडीएम सैंपल रखने के निर्देश दिए थे। शुरुआती महीनों में निर्देशों पर अमल करने के बाद व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई।
मेन्यू के अनुसार बुधवार को स्कूलों में दूध और तहरी का वितरण किया जाना था। अधिकांश स्कूलों में एमडीएम का नमूना ही नहीं मिला। असोहा विकासखंड के पूर्व माध्यमिक स्कूल व प्राथमिक स्कूल रायपुर के अलावा मंगतखेड़ा प्राथमिक विद्यालय, बिछिया प्राथमिक स्कूल में खाने का सैंपल नहीं मिला। वहीं बिछिया विकासखंड के मैकुआखेड़ा में 123 में 80 बच्चे उपस्थित थे। यहां 12.30 पर तहरी बनाई जा रही थी।
इंचार्ज टीचर सुमन ने बताया कि बच्चों को ूध दिया गया है। थोड़ी देर बाद तहरी दी जाएगी। शहर के आवास-विकास बी ब्लाक में संचालित प्राइमरी स्कूल में बच्चे तहरी खाते मिले। यहां सैंपल भी रखा गया था।
सफीपुर विकासखंड के लूटापुर प्राथमिक स्कूल में निरीक्षण के दौरान बच्चों ने बताया कि एमडीएम तो मिला है लेकिन खाने का सैंपल नहीं रखा मिला। प्रधान टीचर सुशीला सिंह इस सैंपल न रखने पर कुछ नहीं बता पाईं। वहीं प्राथमिक स्कूल चकलवंशी में भी एमडीएम का सैंपल नहीं था।