उन्नाव। पुलिस लाइन परिसर में एक कमरे में नर कंकाल मिलने की गुत्थी सुलझाने के लिए प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की छह सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को बोरियों और पोटलियों में लगी चिट और पोस्टमार्टम रजिस्टर का मिलान कर उनकी पहचान की कवायद की।
जांच में 74 बिसरा चिह्नित किए हैं जिनमें 47 कंकाल का रिकार्ड से मिलान हो पाया। कई बोरियां फटने और दीमक लगने के कारण उनमें लगाई गई पोस्टमार्टम व मुकदमा से संबंधित चिट न मिलने से अभी रिकार्ड से मिलान नहीं हो पाया है। कमरे में मिले कंकाल 1980 से 2007 तक के हैं। इनमें अधिकतर 1995 से पूर्व के हैं। जांच टीम शुक्रवार को किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। फोरेंसिक एक्सपर्ट डा. ग्याशुद्दीन खान ने बताया कि जांच में कितना वक्त लगेगा यह अभी नहीं बताया जा सकता। दो तीन दिन का वक्त और लग सकता है।
शुक्रवार को पुलिस लाइन अस्पताल के पास एक कमरे में दर्जनों मानव कंकाल मिलने से जिले से लेकर सूबे तक के अधिकारियों में खलबली मचने के बाद शुक्रवार को छह सदस्यीय टीम ने जांच शुरू की। जांच टीम में शामिल सिटी मजिस्ट्रेट हरिलाल यादव, सीओ सिटी गोपीनाथ सोनी, चिकित्साधिकारी डॉ आशुतोष वार्षणेय व डॉ कौशलेंद्र सिंह, फार्मेसिस्ट रामपाल वर्मा और लखनऊ से आए फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. गयासुद्दीन खान हैं।
इस दौरान सीएमओ डा. गीता यादव भी मेडिकल स्टॉफ के साथ मौके पर मौजूद रहीं। बोरियों में रखे सभी कंकालों को बोरियों के ऊपर और भीतर रखी डिटेल चिट के आधार पर पुराने पोस्टमार्टम रजिस्टर से मिलान किया गया। जांच में अबतक कुल 74 बिसरा चिह्नित किए गए जिनमें 47 का रिकार्ड मिल गया जबकि अन्य की जांच के लिए टीम रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं।
बोरियों में मिली चिट डिटेल के मुताबिक कमरे में मिले कंकाल वर्ष 1980 से 2007 के हैं। जिनमें से अधिकांश 1995 से पूर्व के हैं। फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. गायसुद्दीन खान ने बताया कि कंकाल बिसरा नहीं हैं। उन्हें पोस्टमार्टम के बाद पहचान के इंतजार में यहां रखवा दिया गया है।
यह मानव अंग किसी मुकदमे से संबंधित हैं या अज्ञात हैं इसकी तफ्तीश की जा रही है। पुलिस के रिकार्ड से मुकदमा नंबर और पोस्टमार्टम रजिस्टर की डिटेल तथा कंकाल की भरी बोरियों में लगी चिट से मिलान किया जाएगा।