उन्नाव। गर्भवती के इलाज में लापरवाही के आरोप पर बीघापुर के एमओआईसी का एक साल का इंक्रीमेंट रोक दिया गया है। दो सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट पर अपर निदेशक ने यह निर्देश दिया है। यहां तैनात एएनएम का भी वेतन रोका गया है।
बीघापुर थानाक्षेत्र के बैजनाथखेड़ा निवासी मधू पत्नी पवन कुमार को प्रसव पीड़ा पर परिजनों ने जुलाई 2018 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीघापुर में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप था कि सीएचसी में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। समय से इलाज न मिलने से महिला की मौत हो गई थी। परिजनों ने चिकित्सा प्रभारी डॉ. पंकज पर लापरवाही का आरोप लगा सीएमओ से शिकायत की थी।
शिकायत पर सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. एके रावत व डिप्टी सीएमओ डॉ. नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। चार माह पूर्व टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट तत्कालीन सीएमओ डॉ. लालता प्रसाद को सौंप दी थी। हालांकि सीएमओ जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुए थे। इस पर उन्होंने दोबारा जांच के आदेश देकर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा था। इस बीच मामला अपर निदेशक स्वास्थ्य तक भी पहुंच गया। हाल ही में अपर निदेशक व सीएमओ को सौंपी गई रिपोर्ट में डॉ. पंकज व एएनएम को गर्भवती की मौत के मामले में लापरवाह पाया गया। जिस पर डॉ. पंकज का एक साल का इंक्रीमेंट रोकने के साथ एएनएम का वेतन रोकने के आदेश दिए गए हैं। सीएमओ डा. केपी सिंह ने बताया कि कार्रवाई से एमओआईसी व एएनएम को अवगत करा दिया गया है।
जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल
दो सदस्यीय जांच टीम ने पहले डॉ. पंकज को क्लीन चिट दी थी। अपने बयान में डॉ. पंकज ने कहा था कि जिस दिन महिला को अस्पताल लाया गया था उस दिन वह अस्पताल में मौजूद नहीं थे। जबकि एएनएम ने अपने बयान में डॉक्टर को फोन कर बुलाने की बात कही थी। एक बार डॉक्टर को क्लीन चिट देने के बाद दोबारा उनकी लापरवाही साबित हो गई। चिकित्सकों में इसका विरोध है।