देश की सबसे बड़ी बैंक एसबीआई है, मगर नोटबंदी के बाद अप्रैल माह मेें ऐसा मौका आया है कि उसे खाताधारकों को भुगतान के लिए खुद ही दूसरे जनपदों से बड़ी मुद्रा मंगाकर खाताधारकों को भुगतान करना पड़ रहा है। करेंसी मिलने पर दसवें दिन एटीएम बूथ में कैश की उपलब्धता कराकर कार्ड धारकों को राहत दी गई।
जिले की एसबीआई मेन ब्रांच एक सप्ताह से करेंसी किल्लत से जूझ रही है। फरवरी माह में की गई 200 करोड़ की करेंसी की मांग अभी तक पूरी न होने से बैंक का बजट बिगड़ गया है। पांच दिनों से तो एसबीआई में खाताधारकों को 5 से 10 हजार के भुगतान भी नहीं हो पा रहे हैं। सोमवार को एसबीआई के अधिकारियों ने हालात बिगड़ते देख गैर जिले की शाखाओं से कैश का जुगाड़ किया। वहीं एटीएम भी चालू किए जा सके। इसके लिए बड़ी करेंसी भी जुटाई गई।
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करेंसी मिलने पर एसबीआई के एटीएम बूथ से दसवें दिन कैश की निकासी संभव हो सकी। इसके अलावा बैंक पहुंचे खाताधारकों को मनमाफिक कैश का भुगतान किया जा सका। एसबीआई के अलावा पीएनबी के एटीएम में भी कैश की उपलब्धता रही। कई दिन बाद एटीएम में कैश होने के चलते दोपहर से शाम तक एसबीआई व पीएनबी के एटीएम में कैश निकालने वालों की खासा भीड़ बनी रही। एसबीआई प्रबंधक दीपेंद्र यादव ने बताया कि गैर जिले की बैंक शाखाओं से करेंसी जुटाकर एटीएम चालू किए जा सके। वहीं बैंक खाताधारकों को भी बीते सप्ताह की अपेक्षा सोमवार को उनकी आवश्यकता के अनुसार भुगतान किया गया।
कितनी करेंसी मंगाई गई है इसके बारे में बताने से इंकार किया। वहीं आरबीआई से एक-दो दिन बाद भी करेंसी न आ पाने की उम्मीद जरूर जताई है। पीएनबी मुख्य शाखा प्रबंधक बीएन शुक्ल ने पर्याप्त करेंसी की बात कही।