श्रीनगर के पंपोर में आतंकी हमले में शहीद हुए बांगरमऊ तहसील के सुल्तानपुर गांव निवासी कैलाश कुमार यादव की मां शिवदेवी के इन शब्दों को सुनकर मौके पर मौजूद लोग अपने आंसुओं को रोक न सके। कैलाश की इच्छा थी कि देश सेवा करते हुए उसकी जान जाए । शनिवार को कुछ ऐसा ही हुआ। उनके शहादत की खबर ने हर किसी को गमगीन कर दिया। शनिवार शाम पत्नी किरन के फोन पर जिस समय खबर आई वह बच्चों के साथ शहर के किशोरीखेड़ा में थीं। रात 12 बजे करीब वह देवर गिरजेश यादव के साथ बच्चों को लेकर गांव पहुंच गईं। रविवार सुबह से शाम तक हजारों की भीड़ घर पर मौजूद रही। कैलाश के पिता स्व. देशराज यादव दो बार गांव के प्रधान रहे। 2003 में उनके निधन के सात साल बाद पत्नी शिवदेवी ग्राम प्रधान चुनी गईं। क्षेत्रीय विधायक बदलू खां शहीद के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधाया। भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकांत कटियार, बसपा नेता इरशाद खां समेत अन्य दलों के नेता शहीद के परिजनों से मिलकर धैर्य बंधाते रहे।
टीचर ने दोहराया अतीत तो भर आईं आंखे
शहीद कैलाश की दसवीं तक की शिक्षा गंजमुरादाबाद के डीसीकेएम इंटर कालेज में हुई थी। उन्हें पढ़ाने वाले टीचर राधाकृष्ण यादव खबर सुनकर शहीद के घर पहुंचे। राधाकृष्ण ने बताया कि स्कूल में जब भी स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस मनाया जाता था, शहीद कैलाश देश भक्ति के गीत गाते थे। बताया, शुरू से उसकी इच्छा सेना में भर्ती होने की थी।
कहा था छुट्टी में आकर मां की सेवा करूंगा
शहीद कैलाश के छोटे भाई विनय ने बताया कि हफ्तेभर पहले मां शिवदेवी का स्वास्थ्य बिगड़ गया। जिस पर उसे शहर के एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया। इसी बीच भाई भैया ने फोन कर मां से कहा, ‘पांच जुलाई को घर आ रहा हूं। इस बार शहर के मकान में मां को रखकर सेवा करूंगा’। वह सिसकते हुए बोला कि मेरा भाई इस मां की सेवा तो न कर सका पर भारत मां की रक्षा करते हुए हमेशा के लिए सबसे दूर चला गया।
गांव में बनेगा शहीद का स्मारक
शहीद कैलाश कुमार यादव के शव को परिजनों ने गांव में ही दफनाने और स्मारक बनवाने का फैसला लिया है। भाई विनय ने बताया कि बटालियन के अधिकारियों ने देर रात तक शव गांव पहुंचने की जानकारी दी है। शव के इंतजार में लोग पूरे दिन गांव में ही बने रहे।