उन्नाव। केंद्र सरकार ने मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में पांच रुपये का इजाफा किया है। अब मजदूरी के तौर पर 156 रुपये के स्थान पर 161 रुपये मिलेंगे। बढ़ी हुई दर एक अप्रैल 2015 से देने के आदेश दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले से जनपद के करीब ढाई लाख मजदूरों को फायदा मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिकों को मजदूरी के लिए बाहर न जाना पड़े इसके लिए केंद्र सरकार ने गांवों में होने वाले विकास कार्यों के लिए महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना चलाई थी। इसके तहत गांवों के विकास के लिए आए धन से 60 प्रतिशत कच्चा कार्य व 40 प्रतिशत पक्के कार्य कराए जा रहे हैं।
जनपद के 16 ब्लाकों में करीब 4 लाख मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं। और इसमें करीब ढाई लाख मनरेगा जॉब कार्ड धारक वर्तमान में कार्य कर रहे हैं। मजदूरी में इस वर्ष पांच रुपये की बढ़ोतरी करते हुए केंद्र सरकार इसे 161 रुपये कर दी है। नई दर एक अप्रैल से लागू की गई हैं। मनरेगा उपायुक्त राजेश मिश्रा ने भी इस बात की पुष्ट िकी है।
योजना से हो रहा मजदूरों का मोहभंग
ग्रामीण मजदूरों का मनरेगा योजना से मोह भंग होता जा रहा है। इसका कारण यह भी है कि श्रमिक अन्य कहीं कार्य करेगा तो उसे ढाई या तीन सौ रुपये मिलेंगे और वह भी नगद। जबकि मनरेगा में कार्य करने पर उसकी मजदूरी अब 161 रुपये हुई है और इसे लेने के लिए उसे कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी कारण मजदूरों का इस योजना से मोह भंग होता जा रहा है।
इस वर्ष 53 करोड़ रुपये खर्च हुआ
जानकारों के मुताबिक बीते वित्त वर्ष 2014-15 में मनरेगा योजना के अंतर्गत जनपद में लगभग 53 करोड़ रुपये खर्च हुआ है। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2013-14 में 86 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। खर्च में हो रही गिरावट भी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की गति मजदूरों की पर्याप्त उपलब्धता न होने से धीमी पड़ी है।
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