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सरकारी सहायता की राह ताक रही आमपट्टी

Sat, 11 Jul 2015 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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सफीपुर (उन्नाव)। आम पट्टी 23 से सुविधाओं व सरकारी सहायता की राह तक रही है। उत्तर प्रदेश की सबसे बड़े क्षेत्रफल वाली आम पट्टी देश ही नहीं विदेशों तक अपने दशहरी आम के लिए जानी जाती है। इसके बाद भी यहां न तो किसी सलाहकार की नियुक्ति की गई और न ही मंडी विपणन व्यवस्था ही लागू हो सकी। सुविधाविहीन इस मंडी से रोजाना एक करोड़ रुपये से ज्यादा का आम प्रदेश की विभिन्न मंडियों में भेजा जा रहा है।
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 इस आम पट्टी में चौसा, सफेदा, बंबइया, तोतापरी आदि कई आम की प्रजातियां उपलब्ध हैं। व्यवसायिक दृष्टिकोण से दशहरी आम को खास माना जाता है। क्योंकि यह अपने स्वाद के लिए देश ही नहीं विदेश तक में पहचान बनाए है। यही कारण है कि सभी आमों में इसकी पैदावार सत्तर फीसदी तक है, जबकि बीस वर्ष पूर्व तक यह 40 फीसदी ही थी। अब मुख्य बाजारों में दशहरी को ही आम का राजा माना जाता है।

जिस आम की पट्टी से हर साल करोड़ों रुपये का व्यवसाय होता है वहां एक ऐसी मंडी भी नहीं है जहां सुरक्षित रूप से आम की बिक्री की जा सके। इसी का परिणाम है कि अधिकांश बड़े खरीददारों ने सीधे बागवानों से संपर्क साध खरीददारी शुरू कर दी। जिससे लोकल स्तर पर आम के व्यापारियों पर असर पड़ा।
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बड़े व्यापारी अब तो सीधा बाग से ट्रक लोड करा रहे हैं। बार-बार मांग करने के बावजूद व्यवसायियों को विपणन की कोई सुविधा नहीं मिल सकी है। जिसकारण जो लाभ इस क्षेत्र को होना चाहिए था। वह महानगरों की बड़ी आढ़त संचालकों को मिल रहा है।

क्षेत्र की बाजारों व बागानों से महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश आदि जगहों से कच्चा आम खरीदकर व्यापारी पैक करा ले जाते हैं। फिर लाइसेंस धारक यह बड़े व्यापारी आम को विदेशों तक पहुंचाकर बड़ा मुनाफा कमाते हैं, लेकिन इस क्षेत्र का व्यवसायी हर सुविधा से वंचित है।
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