उन्नाव। इस बार फलों का राजा आम महंगा बिक सकता है। आंधी और ओलावृष्टि ने आम को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। करीब 40 फीसदी आम का उत्पादन घटने की आशंका से उत्पादक परेशान हैं। ऐसे में सीजन में आम की कम पैदावार होने का असर इसकी कीमत पर देखने को मिलेगा।
जिले में मियागंज और हसनगंज क्षेत्र आम पट्टी के लिए मशहूर हैं। यहां से आम दूसरे जनपदों व राज्यों में भेजा जाता है। तीन दिन पहले बांगरमऊ, मियागंज व हसनगंज क्षेत्र में जबरदस्त ओलावृष्टि हुई थी। बताया जाता है कि तेज आंधी और ओलावृष्टि से बौर झड़ गए हैं। इससे आम की लगभग 40 फीसदी फसल नष्ट हो गई है। जानकार बताते हैं कि यदि आम का उत्पादन कम होगा तो निश्चित रुप से इसका असर कीमतों पर दिखेगा।
जिले में हैं पांच प्रमुख आम पट्टी
उन्नाव। जिले में आम की फलपट्टी के रूप में पांच ब्लाक क्षेत्र मुख्य हैं। इसमें सफीपुर में 11 हजार हेक्टेयर, मियांगज में 7 हजार हेक्टेयर, फतेहपुर चौरासी में 25 सौ हेक्टेयर, हसनगंज में 10 हजार हेक्टेयर और औरास में 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम के बागान हैं। इसके साथ ही जिले में बीघापुर, सुमेरपुर, नवाबगंज, बिछिया, सिकंदरपुर करन, सिकंदरपुर सरोसी, औरास, असोहा आदि क्षेत्र में भी आम की पैदावार होती है।
संकट में आम उत्पादक और व्यापारी
उन्नाव। जानकारों की मानें तो आम की बागानों की खरीददारी किसानों और व्यापारियों के मध्य पिछली फसल के बाद ही हो जाता है। व्यापारी पहले से कुछ पैसा किसान को बानगी के रुप में दे देता है और शेष पैसा फसल खत्म होने से पहले दिया जाता है। इसके बाद व्यापारी आम की बागान की देखभाल के साथ पेड़ों की कई बार धुलाई करवाता है जिससे आम के पेड़ में बौर अच्छी तरह से आये जिससे उत्पादन अच्छा हो। अब आंधी और ओलावृष्टि व फिर बारिश से आम की फसल को भारी नुकसान हो गया है। व्यापारियों के सामने अब समस्या यह उत्पन्न हो गयी है कि जो लागत देकर उन्होंने बाग खरीदे हैं वह कैसे निकलेगी।
पिछले वर्ष 3.24 लाख मीट्रिक टन आम का हुआ था उत्पादन
उद्यान विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जिले में लगभग 3.24 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष आम के उत्पादन का लक्ष्य लगभग 3.45 लाख मीट्रिक टन रखा गया। पर आंधी व ओलावृष्टि से लक्ष्य के सापेक्ष उत्पादन होना मुश्किल नजर आ रहा है।