इलाज के लिए कानपुर जाते समय फतेहपुर के कल्यानपुर थाना क्षेत्र के दूधीकागार आश्रम मोड़ के पास से अपहृत भट्ठा मालिक देवेंद्र शुक्ला बुधवार रात करीब साढ़े तीन बजे अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूट गए। सूचना पर पहुंचे परिजन उन्हें घर ले गए। पीड़ित ने कल्याणपुर थाने में अपने पूर्व पार्टनर के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने मामले में पब्लिक कनेक्शन का सहारा लिया। सूत्रों के मुताबिक आरोपी से पुलिस संपर्क में आई तब जाकर अगवा व्यापारी को मुक्त कराया जा सका।
मालूम हो कि बारासगवर थानाक्षेत्र के जगतपुर गांव निवासी भट्ठा कारोबारी देवेंद्र शुक्ल मंगलवार देर शाम बोलेरो से इलाज के सिलसिले में चालक ऊंचगांव निवासी लल्ला व धानीखेड़ा निवासी भोला के साथ कानपुर जा रहे थे। फतेहपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में दूधी कगार के पास जीप सवार लोगों ने बोलेरो को ओवरटेक कर रोक लिया और आगे बैठे भट्ठा कारोबारी को खींच कर अपनी जीप में डालकर भाग निकले। ड्राइवर ने देवेंद्र शुक्ला के भाई व ग्राम प्रधान मनोज शुक्ला को अपहरण की सूचना दी। परिजनों ने कल्याणपुर थाने में मदद की गुहार लगाई। पुलिस तलाश कर रही थी इसी दौरान बुधवार तड़के करीब तीन बजे अपहर्ताओं ने उसे नाटकीय अंदाज में फतेहपुर के मलवां थाना क्षेत्र में छोड़ दिया। पीड़ित देवेंद्र शुक्ला ने बताया कि आरोपी पूर्व प्रधान सोनू सिंह और उसके साथी अपहरण करके जीप में बैठाकर कीर्तिखेड़ा गांव ले गए थे। रास्ते में जेब में पड़े 50 हजार रुपये लूट लिए और मोबाइल और डायरी सड़क पर फेंक दी थी। वहां से स्कार्पियो में बैठाकर वापस मौहार गांव ले गए। वहां एक कोठरी के अंदर बंधक बनाकर रखा। उनके साथ गालीगलौज और मारपीट भी की। आरोपी ने उनके बेटे शिवम शुक्ला को मोबाइल मिलाया और घर से जितना भी कैश हो लेकर आने की धमकी दी थी। पुलिस अपहरणकर्ता के संपर्क में रही है। रात में एक स्विफ्ट डिजायर कार लेकर दो लोग मौहार गांव पहुंचे। तब उसे कोठरी से बाहर निकाल मलवां थाने के दलाबड़ाखेड़ा मोड़ पर छोड़ गए।
बयानों पर बढ़ाई जाएंगी धाराएं
सीओ आरके वर्मा ने बताया कि एफआईआर अपहरण के तहत दर्ज की गई थी। पीड़ित के बयानों पर धाराएं बढ़ाई जाएंगी। आरोपियों की तलाश की जा रही है। घटना में इस्तेमाल वाहनों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा। मामला 11 लाख रुपये के लेन-देन का है।
पीड़ित का कराया गया मेडिकल
भट्ठा मालिक देवेंद्र के अनुसार पिछले साल आरोपी पूर्व प्रधान अपहृत के भट्ठे में उनका पार्टनर था। उसका सारा हिसाब हो चुका था। उनके पास कोई रकम आरोपी की नहीं बकाया है। उसने अपहरण दबाव बनाकर अवैध वसूली के लिए किया था। पुलिस ने बरामदगी के बाद उसका मेडिकल कराया है।