उन्नाव। विकासखंड हिलौली की ग्राम पंचायत खानपुर में तीन कामों में निर्धारित बजट से 2.90 लाख का ज्यादा का भुगतान करने के मामले में प्रधान व सचिव दोषी पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने प्रधान के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज कर दिए। वहीं, डीपीआरओ को ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
खानपुर निवासी मनोज कुमार बाजपेयी ने डीएम को शपथपत्र पर गांव में कराए गए विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत की थी। जिलाधिकारी ने मामले में दो सदस्यीय टीम गठित कर दी थी। टीम में शामिल डीआरडीए परियोजना निदेशक और आरईडी असोहा के अवर अभियंता ने गांव जाकर शिकायतों का स्थलीय सत्यापन किया। जांच में पंचायत भवन निर्माण में माप पुस्तिका के अनुसार, मजदूरी में 2,43,283 रुपये के सापेक्ष 1,03,515 रुपये का भुगतान किया गया जो 1,39,768 रुपये कम निकला।
वहीं, निर्माण सामग्री पर 12,21,986 रुपये के सापेक्ष 14,69,612 रुपये का भुगतान किया गया। जो 2,47,626 रुपये अधिक मिला। प्राथमिक विद्यालय विशंभरखेड़ा में दीवार निर्माण में माप पुस्तिका में लंबाई 120 मीटर दर्ज थी। जबकि वास्तविक लंबाई 105.50 मीटर ही निकली। लागत एवं भुगतान 3,71,752 रुपये का किया गया। जबकि 105.50 मीटर लंबाई की वास्तविक लागत 3,28,628 रुपये ही निकली।
इस आधार पर वास्तविक लागत से 43 124 रुपये का ज्यादा भुगतान पाया गया। कुल 2,90,750 रुपये की गड़बड़ी मिली थी। इस पर प्रधान रविशंकर यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर डीएम ने प्रधान के अधिकार सीज कर दिए। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि प्रधान के अधिकार सीज कर दिए गए हैं। वहीं सचिव धर्मेंद्र कुमार पर कार्रवाई के आदेश डीपीआरओ को दिए गए हैं। गांव में विकास कार्यों के संचालन के लिए जल्द ही त्रिस्तरीय समिति गठित की जाएगी।
सामुदायिक शौचालय तो मिला पर निर्माण के अभिलेख नहीं मिले
जांच टीम ने 5.71 लाख लागत के सामुदायिक शौचालय का भी निरीक्षण किया। मूल्यांकन में मजदूरी व निर्माण सामग्री का भुगतान जांचा। यहां पर भुगतान में तो कोई गड़बड़ी नहीं मिली, लेकिन शौचालय निर्माण से संबंधित अभिलेख बिल, बाउचर आदि उपलब्ध नहीं मिले। जिस पर जांच टीम ने प्रधान एवं सचिव को संयुक्त रूप से दोषी पाया।