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खांदी कटने से फसलें बर्बाद, सदमे में अन्नदाता

Wed, 09 Dec 2015 12:58 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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शारदा नहर की पुरवा ब्रांच की तली तक सफाई न होने, ज्यादा पानी छोड़े जाने व नहर की पटरी कम चौड़ी होने से एक माह बाद फिर नहर की खांदी कट गई। इससे सैकड़ों बीघा में बोई गई गेहूं व खेतों में कटी पड़ी धान की फसलें पानी में डूब गईं।
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खबर लगते ही तहसील और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घंटों मशक्कत के बाद किसानों ने खांदी बांधने में सफलता पाई।

 
पुरवा ब्रांच नहर की खांदी सोमवार रात 11 बजे मद्दीखेड़ा गांव के पास कट गई। कुछ ही देर में पानी खेतों में भर गया। इससे मद्दीखेड़ा, बिछिया समेत अन्य क्षेत्र की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्र हो गई। गांव के लोग जब सुबह शौच को निकले तो खेतों में पानी भरा देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।


ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुमानी सिंह ने सूचना डीएम को दी। वहीं किसान खुद टूटी नहर को बांधने में जुट गए। मिट्टी की बोरी व मोटे लकड़ी के टुकड़ों से लगभग दो बजे नहर को बांधने में किसानों को सफलता मिली।
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खांदी कटने से पप्पू सिंह यादव की 30 बीघा गेहूं की फसल, बिंदा प्रसाद की दो बीघा धान की कटी फसल, सुरेश, रामचंद्र, लल्लू, इंद्रपाल व कल्लू की 50 बीघा धान की कटी फसल जलमग्न हो गई। नहर विभाग के अधिशासी अभियंता ब्रजेश कुमार पोरवाल, जेई केके माथुर व लेखपाल रामदेव मिश्रा मौके पर पहुंचे।

 

पहले भी दो बार कट चुकी है खांदी- बिछिया। शारदा नहर की पुरवा ब्रांच की खांदी कटने का यह पहला मामला नहीं है। नवंबर की शुरुआत में और उसके एक हफ्ते पहले भी यह खांदी कट चुकी है।


सिंचाई विभाग इस ओर ध्यान नहीं दिया। तब बिछिया ब्लाक के गांव घूरखेत व बिछिया के किसानों पर नहर का कहर टूटा था और सैकड़ों गरीब किसानों की धान फसल जलमग्न हो गई थी।

 

अन्नदाता रोए, अधिकारी सोए- लगातार खांदी कटने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके चलते अन्नदाता खून के आंसू रोने को मजबूर हैं। इसके बावजूद उनके आंसू पोंछने के लिए न प्रशासनिक व विभागीय अधिकारी के पास समय है। सोमवार रात खांदी कटने से किसानों के सामने फिर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
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