हरदोई। उंगली काटने के मामले में करीब 38 साल बाद फैसला आया। मामले में दोषियों को जेल नहीं, तीन माह के प्रोबेशन की सजा सुनाई गई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद यूनिस ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोनों को जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां तीन माह हाजिरी लगानी होगी।
पिहानी कोतवाली के पंडरवा किला गांव निवासी अमजदी बेगम पत्नी यासीन ने 28 जुलाई 1988 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि 19 जुलाई 1988 को वह अपनी पुत्री उमर जहां को डांट रही थीं तो पड़ोसी आसिफ, अरबी पुत्र नवाब और कल्लन पुत्र हबीब जो उससे रंजिश व जलन मानते थे, उसकी डांट-डपट को टेप कर रहे थे। ऐसा करने से मना किया तो कहासुनी पर आसिफ, अरबी व कल्लन लाठी-डंडा लेकर घर में घुस आए और मारने लगे। शोर पर उनकी पुत्री उमर जहां बचाने आई तो उसे भी लाठियों से मारने लगे। इस बीच अरबी की मां दिलबरी कांता (चापड़) लेकर आई और कहा कि जान से मार दो। आसिब ने कांता से अमजदी की उंगली काट दी थी। शोर पर कई लोग बचाने आए थे। जानमाल की धमकी देते हुए आरोपी मौके से भाग गए थे।
सुनवाई के दौरान अरबी व दिलबरी की मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह व छह अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। आरोपियों के अधिवक्ता ने बचाव में कम से कम सजा दिए जाने का तर्क दिया। सहायक अभियोजन अधिकारी ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सजा सुनाई।
न्याय की चौखट पर दस्तक देते-देते तीन दशक से अधिक का समय बीत गया। समय बीतने के साथ दोनों पक्षों के लोगों के बाल सफेद हो गए, चेहरे पर झुर्रियां आ गईं। वहीं दो आरोपियों की मुकदमे के दौरान मौत हो गई लेकिन कानून के हाथ आखिरकार दोषियों तक पहुंच ही गए।