उन्नाव। डीएम के आदेश पर जिले के 54 अधिकारियों ने विद्यालयों की पठन-पाठन की स्थिति जांची तो परिणाम देख दंग रह गईं। कई विद्यालय में कक्षा पांच के बच्चों को पांच का पहाड़ा तक नहीं आता था और सामान्य ज्ञान तो ऐसा कि वह प्रदेश के सीएम का नाम तक नहीं बता सके।
जिले में सभी सरकारी विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्वक शिक्षा की जांच के लिए जिलाधिकारी ने जिले के 54 अधिकारियों को अलग-अलग विद्यालयों में भेजा था। सभी को इस जांच में विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति, शिक्षा की गुणवत्ता, सामान्य ज्ञान व खानपान संबंधी व्यवस्थाओं की जांच करनी थी। लेकिन अधिकारियों की जांच में जो खुलासा हुआ है उससे तो सरकारी विद्यालयों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगा है।
अधिकारियों की जांच में जिले बांगरमऊ स्थित प्राइमरी विद्यालय कुंडा में बच्चों की उपस्थिति मात्र 32 प्रतिशत, प्राइमरी विद्यालय धन्नापुरवा में 28 प्रतिशत, प्राइमरी विद्यालय नयनसुख खेड़ा में 44 प्रतिशत, प्राइमरी विद्यालय छगनलाल खेड़ा में 53 प्रतिशत और प्राइमरी विद्यालय चहचहा में 42 प्रतिशत ही पाई गई।
इसके अलावा शिक्षा की गुणवत्ता की स्थिति यह रही कि कक्षा पांच का बच्चे पांच का पहाड़ा नहीं सुना सके। इसके अलावा इन बच्चों से जब प्रदेश के सीएम का नाम पूछा गया तो उन्हें सीएम का नाम भी नहीं बता था।
बेसिक शिक्षाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि जांच की आख्या प्राप्त हो चुकी है। अधिकारियों द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता व छात्रों की उपस्थिति को काफी दयनीय बताया गया है। यह काफी निंदनीय है। आने वाले समय में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जाएंगे।