फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सहालग के बाद भी कपड़ा व्यापार ठंडा

Mon, 28 Nov 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
विज्ञापन
खरीदारी करते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
बड़े नोट की पुरानी करेंसी बैन हुए 19 दिन का समय बीत चुका है लेकिन मार्केट की रौनक अभी भी धूमिल है। सहालग के दिनों में पीएम के फैसले से कपड़ा व ज्वैलरी व्यापार दम तोड़ता नजर आ रहा है। अमर उजाला टीम ने रविवार को शहर के धवन रोड, बड़ा चौराहा व स्टेशन रोड स्थित कपड़ा मार्केट का हाल जाना। नोट बंदी से पहले हर समय भीड़ से गुलजार रहने वाली धवन रोड मार्केट में रविवार को खरीदारों की भीड़ न के बराबर थी। इस बीच बड़ा चौराहा स्थित एक गारमेंट्स की दुकान पर कुछ भीड़ नजर आई। दुकानदार के पास जाकर बातचीत की गई तो पता चला कि नोट बंदी के पहले रविवार को दुकान में भीड़ का तांता लगता था। भीड़ के सवाल पर जवाब मिला कि जिनके घरों में शादी है। उनसे बड़े नोट लेकर राहत दी है। तो वहीं स्टेशन रोड़ की दुकानों में भी एक-दो खरीदार ही नजर आ रहे थे। दुकानदारों ने बातचीत में कहा कि नोट बंदी से फिलहाल व्यापार का पहिया बेपटरी है। सौ फीसदी का व्यापार तीस फीसदी में ही सिमट कर रह गया है। व्यापारी फैसले को तो सही ठहरा रहे थे लेकिन व्यापार प्रभावित होने की कसक चेहरों पर साफ झलक रही थी।
विज्ञापन


नोट बंदी की मार से संडे ने भी तोड़ी उम्मीद  
पांच सौ व हजार के नोट बंद होने से व्यापार को तगड़ा झटका लगा है। छोटे नोट न होने से व्यापार दम तोड़ रहा है। लाखों का व्यवसाय हजारों में ही सीमित होकर रह गया है। यह हाल तब है जब सहालग के दिन चल रहे हैं। - कृष्णा गुप्ता कपड़ा दुकानदार

करेंसी की किल्लत ने बिगाड़ दी व्यापार की गणित
सहालग के साथ ही रविवार का दिन भी व्यापार के नाम पर फीका गया। खरीदार तो आए लेकिन उम्मीद से कहीं कम। करेंसी की किल्लत ने फिलहाल व्यापार की गणित बिगाड़ दी है। सचिन गुप्ता कपड़ा दुकानदार
विज्ञापन


नोटबंदी टेलीकाम कंपनी के लिए बना फायदे का सौदा
उन्नाव। बड़े नोट की पांबदी के बाद सरकार ने आम जनमानस को राहत देते हुए टेलीकाम कंपनियों के रीचार्ज कूपन काउंटर पर पांच सौ नोट मान्य किया है। साथ ही पांच सौ के नोट का नंबर, रीचार्ज होने वाला नंबर के साथ ही जरूरत समझे जाने पर आईडी प्रूफ का डाटा जमा करान के निर्देश भी दिए हैं। जिससे कंपनियां रीचार्ज के नाम पर ब्लैकमनी को सफेद न कर सकें। सरकार के आदेश पर अमल करते हुए कंपनियों ने मुनाफे का रास्ता भी निकाल लिया है। कई टेलीकाम कंपनियों ने रीचार्ज कूपन पर 15 से 20 फीसदी बढ़ोत्तरी की है। इससे कई रीचार्ज स्कीम पांच सौ रुपये के आंकड़े पर जाकर टिक गई हैं।

 कंपनी के फैसले से लोगों को मिली राहत
 वैसे तो सभी टेलीकॉम कंपनियों ने पांच सौ रुपये के नोट मान्य किए हैं। शर्तों के साथ एक कंपनी पांच सौ रुपये के रीचार्ज पर ग्राहक को अतिरिक्त टाक टाइम भी दे रही है। गौरी तिवारी फ्रेंचाईजी डीलर

पांच सौ का नोट बना दिक्कतों का कारण
मोबाइल सिम के रीचार्ज पर टेलीकाम कंपनियों में पांच सौ रुपये का नोट का मान्य किया जाना सरकार का राहत भरा फैसला है। तो वहीं सख्त नियमों की बंदिशे काफी दिक्कत का कारण बन रही है। आईडी व मोबाइल नंबर पर मांगने पर लोग झगड़ने को तैयार हो जाते हैं। सत्यम गुप्ता सब डिस्ट्रीब्यूटर
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें