उन्नाव। दो ग्राम पंचायतों में छह महीने में जारी किए गए 6213 जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को लेकर बड़े गड़बड़ झाले की आशंका जताई जा रही है। बड़ी बात यह है कि इसी अवधि में जहां 10 ग्राम पंचायतों में मात्र 724 प्रमाणपत्र जारी किए गए। वहीं अकेले हसनगंज की निमादपुर में 5893 प्रमाणपत्र बना दिए गए। आशंका तो यह भी है कि इस आईडी से गैर जनपदों के भी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा सकते हैं। पूर्व में हरदोई में इसी तरह का मामला पकड़ा जा चुका है।
केंद्र सरकार के जनगणना कार्य निदेशालय ही सीआरएस पोर्टल से जारी जन्म- मृत्यु प्रमाणपत्रों की निगरानी करता है। पिछले दिनों निदेशालय द्वारा ऑनलाइन तरीके से ही रैंडम आधार पर जनपद की ग्राम पंचायतों से बने प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। इस दौरान 12 गांवों से जारी प्रमाण पत्रों की जांच की गई तो पता चला कि इनमें से 10 गांवों से किसी में 60 तो किसी में 93 प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी सामने आई। इसी बीच शेष दो पंचायतों में निमादपुर व मकूर की जांच की गई तो क्रमश: 5893 व 320 प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि हुई। इसमें निमादपुर से जुड़ी बड़ी बात यह रही कि इस गांव की आबादी 5200 के आसपास ही है। जबकि प्रमाणपत्र 5893 जारी हो गए। इसका सीधा सा अर्थ है कि जितने कुल लोग गांव में हैं उतने से ज्यादा लोग या तो पैदा हो गए या मृत हो गए। अब इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने बताया कि संबंधित पंचायत सचिवों को नोटिस जारी किया गया है। जवाब का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या है सीआरएस पोर्टल
सीआरएस पोर्टल के जरिए जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। पोर्टल की लॉगइन आईडी व पासवर्ड केवल ग्राम पंचायत सचिव के ही पास ही रहती है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी 30 दिन तक की अवधि के आवेदन स्वीकृत करते हैं। जबकि इससे ज्यादा पुराने प्रमाणपत्रों के लिए डीपीआरओ और एसडीएम स्तर से स्वीकृति दी जाती है।
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आईडी हैक कर प्रमाण पत्र बनवाने का पकड़ा जा चुका मामला
दो ग्राम पंचायतों में इतने ज्यादा प्रमाणपत्र जारी होने में आईडी हैक होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे पहले औरास सीएचसी में ऐसा हो चुका है। 18 जनवरी को औरास सीएचसी प्रभारी डॉ. अनूप सिंह ने थाने में स्वास्थ्य केंद्र के सीआरएस पोर्टल को हैक कर आईडी और पासवर्ड बना कर फर्जी तरीके से 55 जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले में साइबर सेल ने जांच के बाद आईडी हैक करने में आरोपी लखनऊ के नौबस्ता सआदतगंज निवासी अभिषेक गुप्ता को पकड़ा था। आरोपी अभिषेक ने बहराइच सहित कई जिलों में यूजर आईडी और पासवर्ड बेचने की बात मानी थी। उसने बताया था कि वह चार से पांच हजार रुपये में प्रमाणपत्र बनाकर देता था।
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ग्राम पंचायतवार जारी प्रमाणपत्र
निमादपुर-5893
मकूर-320
पारा-93
दूलीखेड़ा-79
मियागंज-71
असरेंदा-70
दीवानखेड़ा-70
गुनजौली-69
मनिकापुर-69
सवाय-68
गुलरिहा-68
संदाना-67
छह माह में जारी 6213 प्रमाणपत्रों को लेकर गंभीर नहीं पंचायतीराज व स्वास्थ्य विभाग
उन्नाव। छह माह में दो ग्राम पंचायतों में जारी 6213 प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर पंचायतीराज व स्वास्थ्य विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। दोनों ही विभाग इस बड़े मामले को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में मामले की जांच फिलहाल तेजी नहीं पकड़ पा रही है।
मालूम हो कि इसी साल एक जनवरी से 15 जुलाई 2025 के बीच सीआरएस पोर्टल (नागरिक पंजीकरण प्रणाली) से हसनगंज की निमादपुर ग्राम पंचायत की पंजीकरण इकाई आईडी 17609 से 5893 और नवाबगंज विकासखंड की मकूर ग्रामसभा की आईडी 17578 से 320 जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए हैं।
पिछले छह महीने में इन दोनों ग्राम सभाओं से इतनी ज्यादा संख्या में प्रमाण पत्र जारी होने से, निगरानी करने वाले केंद्र सरकार के जनगणना कार्य निदेशालय ने संदिग्ध व फर्जी मानते हुए प्रदेश के विभागीय अधिकारियों को पत्र जारी किया था। इसके बाद प्रदेश के संयुक्त निदेशक एवं सहायक महारजिस्ट्रार एके राय ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जांच के लिए कहा।
डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने एक तरफ तो संबंधित पंचायत सचिवों को नोटिस जारी करके उनसे जवाब तो मांग लिया, लेकिन दूसरी ओर सीआरएस पोर्टल का कंट्रोल सीएमओ कार्यालय से होने की बात कहकर गेंद उनके पाले में फेंक दी। डीपीआरओ ने तकनीकी जानकारी के लिए एक पत्र सीएमओ कार्यालय को भेजने की बात कही।
उधर, प्रभारी सीएमओ डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने बताया कि उनके पास अभी पत्र नहीं पहुंचा है। वैसे पोर्टल की आईडी व पासवर्ड संबंधित पंचायत सचिव को जारी किया जाता है। जो प्रमाणपत्र जारी होते हैं वह उनकी आईडी से ही होते हैं। दोनों विभागों के एक दूसरे की जिम्मेदारी बताने से फिलहाल मामले के दबाने की अटकलें भी लगाई जाने लगी हैं।