भारी वाहन चालकों की रफ्तार पर अंकुश नहीं लगा पा रहे जिम्मेदार
टोल टैक्स बचाने के लिए हाईवे के बजाए अजगैन-मोहान मार्ग से निकलते हैं भारी वाहन
संवाद न्यूज एजेंसी
हसनगंज। टोल टैक्स बचाने के लिए भारी वाहन अजगैन-मोहान मार्ग पर दिन भर रफ्तार भरते रहते हैं। इनकी चपेट में आकर अक्सर हादसे होते हैं। मंगलवार को भी बाइक सवार देवर, भारी और भतीजी की मौत तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आने से हुई।
हाईवे पर नवाबगंज टोल प्लाजा से निकलने पर पड़ने वाला टोल टैक्स बचाने के लिए रोजाना औसतन पांच हजार गिट्टी, मौरंग, बालू लदे व अन्य भारी वाहन अजगैन-मोहान मार्ग से निकलते हैं। इसी रास्ते से लखनऊ की दुबग्गा मौरंग मंडी जाते हैं। यह मार्ग कानपुर-लखनऊ हाईवे, लखनऊ-कन्नौज मार्ग और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को भी जोड़ता है। बिठूर, कन्नौज, हरदोई, शाहजहापुर, मलिहाबाद, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी सहित अन्य जिलों के लिए आवागमन करने वाले वाहन इसी मार्ग से निकलते हैं।
हाल के दिनों में अजगैन-मोहान पर हुए हादसों पर एक नजर
7 मई 2025- मोहनलाल गंज निवासी रामसेवक की हसनगंज में डंपर की टक्कर से मौत।
01 मई 2025- नई सराय गांव में अज्ञात डंपर की टक्कर से मुस्तफाबाद गांव निवासी शुभम गौतम की मौत।
24 मार्च 2025- चमरौली निवासी अभिषेक त्रिवेदी की छोटखेड़ा गांव के पास तेज रफ्तार डंपर की टक्कर से मौत।
14 मार्च 2025- नई सराय गांव निवासी सरवन 50 वर्ष की सड़क हादसे में मौत।
11 दिसंबर 2024- लखनऊ चिनहट निवासी कमरू निशा की खपरा मुस्लिम गांव के सामने डंपर की टक्कर से मौत।
08दिसंबर 2024- नई सराय गांव निवासी संजू गुप्ता 45 वर्ष की रानी खेड़ा गांव के अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत।
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दादी की डांट ने बचाई बड़ी पौत्री की जान
हसनगंज। रंगीता जिस समय देवर गौरव के साथ बाइक से छोटी बेटी आकृति को डॉक्टर को दिखाने जा रही थी, तभी बड़ी बेटी अनन्या (4) भी साथ जाने की जिद करने लगी। वह चाचा के साथ बाइक पर बैठ भी गई थी। लेकिन इसी दौरान दादी राजेश्वरी ने स्कूल जाने की बात कहते हुए डांट दिया। इस पर वह अनमने मन से स्कूल जाने को तैयार हो गई।
उसे उदास देख चाचा गौरव ने उसे बाइक पर बैठाया और गांव के प्राथमिक विद्यालय छोड़ने गया। इसके बाद भाभी और भतीजी को बाइक से अस्पताल के लिए निकला था। हादसे के बाद गौरव की पत्नी, बेटी बेहाल हैं। छोटे भाई की मौत से बेहाल अंकित ने बड़ी बेटी अनन्या को सीने से चिपका लिया। वह बिलखते हुए बोला, अगर दादी की बात न मानती तो शायद वह भी हादसे की शिकार हो गई होती। वह किसका चेहरा देखकर जिंदगी बिताता। वहीं, छोटे बेटे, बड़ी बहू और पौत्री का शव देकर राजेश्वरी और बंशीलाल भी बेहाल रहे।
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तीन मौतों से पड़ोसी के शादी वाले घर में सन्नाटा
हादसे का शिकार हुए देवर, भाभी और बच्ची जिस मोहल्ले में रहते हैं वहां घर के बगल में रहने वाले मनोज की बेटी की मंगलवार को बरात आनी है। घर में खुशियां का माहौल था, तैयारियां चल रही थीं, मृतक का परिवार भी उसमें सहयोग कर रहा था, लेकिन अचानक एक साथ तीन मौतों से खुशियां गम में बदल गईं। पड़ोसी के घर में तीन मौतों से डीजे वाले को मना कर दिया गया। बरातियों से भी बैंड बाजा नही लाने को कह दिया गया। शादी के रस्में सादगी से संपन्न कराई जा रही हैं।