लखनऊ रवाना होने से पहले जिला अस्पताल में परिसर में बैठकर नारेबाजी करते एंबुलेंस चालक। संवाद
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उन्नाव। मांगों को लेकर 11 दिनों से हड़ताल कर रहे एंबुलेंस चालक व ईएमटी को सेवा प्रदाता जीवीके कंपनी ने बर्खास्त कर दिया है। इनमें वह चालक और ईएमटी भी शामिल हैं जो हड़ताल में शामिल होने के कुछ दिन बाद काम पर लौट आए थे। सोमवार को बर्खास्तगी का पत्र मिलने के बाद सभी चालक व ईएमटी लखनऊ में चल रहे धरने में शामिल हुए।
जिले में 108, 102 और एएलएस की 87 एंबुलेंस हैं। इसमें 300 चालक व ईएमटी की तैनाती है। छह सूत्री मांगों को लेकर चालक व ईएमटी 23 जुलाई से जिला अस्पताल परिसर में धरना दे रहे थे। 27 जुलाई को जिला प्रशासन ने एंबुलेंस चालक व ईएमटी ने वापस लौटने का दबाव बनाया था। बिना मांग पूरी काम पर वापस न लौटने की जिद पर 28 जुलाई को एंबुलेंस प्राइवेट चालकों के हाथों में चाभियां सौंप दी गई थीं। नौकरी जाने के डर से 30 जुलाई को धरने में शामिल पांच चालक व पांच ईएमटी काम पर लौटा आए थे। सोमवार को जीवीके की ओर से चालक व ईएमटी को बर्खास्तगी का पत्र भेज दिया गया। बर्खास्तगी पत्र में 27 जुलाई की तिथि पड़ी हुई है।
एंबुलेंस चालक संघ के जिलाध्यक्ष विवेक कुमार ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष को जेल भेज दिया गया है। अब तो बर्खास्तगी का पत्र मिल ही गया है। जो भी होगा आगे देखा जाएगा। एंबुलेंस सेवा जिला प्रभारी एसीएमओ डॉ. विजय गुप्ता ने बताया कि हड़ताल के दौरान काम पर लौटे चालक व ईएमटी को पुन: रखने के लिए कंपनी से बात की जा रही है। कंपनी ने नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।