उन्नाव। कोरोना काल में बच्चों को अन्य बीमारियों से बचाने के लिए होने वाला टीकाकरण प्रभावित हुआ है। हालांकि कोरोना काल में भी स्वास्थ्य विभाग बच्चों को टीका लगवाने की सुविधा दे रहा है, लेकिन परिजन इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। इस समय तीसरी लहर में बच्चों के कोरोना से प्रभावित होने के बंदोबस्त पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही बच्चों को अन्य बीमारियों से बचाने के लिए टीके लगवाना भी जरूरी है।
जन्म के बाद डेढ़ साल तक बच्चों को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग हेपेटाइटिस बी, बीसीजी, पोलियो, डीपीटी व टीबी का टीका लगाता है। यह टीके जिला महिला अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्रों व एएनएम सेंटरों पर लगाए जाते हैं। साल 2019 में अन्य वर्ष की अपेक्षा अधिक बच्चों का टीकाकरण हुआ था। उसके बाद कोरोना आ गया और टीकाकरण की गति धीमी होती गई। हालांकि अभी भी जिले में बुधवार और शनिवार को एएनएम सेंटर पर टीकाकरण चल रहा है।
राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत गाइडलाइन तय की गई है। उसके मुताबिक बीसीजी और ओपीवी नवजात को जन्म के तुरंत बाद दिया जाना चाहिए। जन्म के 24 घंटे के अंदर हेपेटाइटिस बी का बर्थ डोज दिया जाता है। एक साल की उम्र के पहले ओपीवी की तीन खुराक, रोटावायरस की तीन खुराक, पेंटावेलेंट की तीन खुराक, आंशिक आईपीसी की तीन खुराक (जहां ये लागू होती है), मीजल्स और एमआर वैक्सीन की पहली खुराक और जेई (जापानीज बुखार) की पहली खुराक (जहां ये लागू हो) अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए।