उन्नाव। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को बेड तो दूर स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों को गाड़ी से उतारने के बाद तीमारदार उन्हें गोद में उठाकर डॉक्टर के पास ले जाने को मजबूर हैं। डॉक्टर भी गंभीर मरीजों को देखते ही कानपुर हैलट रेफर कर रहे हैं।
गांधीनगर निवासी जुगल किशोर (75) का अचानक ऑक्सीजन स्तर घट गया। परिजनों ने पहले घर पर ही ऑक्सीजन की व्यवस्था की। सुधार न होने पर जिला अस्पताल लाए। परिजनों ने स्ट्रेचर की तलाश की। न मिलने पर गोदी में उठाकर इमरजेंसी ले गए। वहां डॉक्टर ने हालत गंभीर देखते हुए कानपुर रेफर कर दिया।
कब्बाखेड़ा निवासी सुंदरलाल (70) का भी ऑक्सीजन स्तर गिरने से परिजन उन्हें बाइक से जिला अस्पताल लाए। परिजनों ने इधर-उधर स्ट्रेचर तलाशा, न मिलने पर गोदी में उठाकर इमरजेंसी लेकर गए। ऑक्सीजन स्तर अधिक न गिरने से डॉक्टर ने उन्हें भर्ती तो किया किया लेकिन बाद में उन्हें भी रेफर कर दिया गया।
हसनगंज तहसीलदार के चालक महेश श्रीवास्तव (45) की हालत अचानक बिगड़ गई। परिजन पहले एंबुलेंस ढूंढ़ते रहे। न मिलने पर अपने वाहन से ही जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाए। वार्ड में भर्ती होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
इमरजेंसी आने वाले मरीजों को सरकारी एंबुलेंस समय पर न मिलने से वह प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा ले रहे हैं। इससे निजी एंबुलेंस चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। बुधवार को इमरजेंसी के बाहर खड़ीं एंबुलेंस 10 हजार या 12 हजार रुपये में मरीजों को कानपुर लेकर गईं।