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बीमार एंबुलेंस को आक्सीजन की दरकार

Fri, 15 Apr 2016 01:12 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पुरवा कोतवाली क्षेत्र के गोकुलपुर गांव निवासी मोनू की शुक्रवार को थ्रेसर में फंसने से मौत हो गई थी। मशक्कत के बाद भी शव न निकलने पर ग्रामीणों ने एंबुलेंस को सूचना दी । मौके पर पहुंची एंबुलेंस शव को फंसा देख लौट गई। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता दर्शाने को यह बानगी है। मरीजों को बेहतर व त्वरित इलाज मुहैया कराने की मंशा से सरकार ने 102 व 108 एंबुलेंस सेवाएं शुरू किया था। मौजूदा समय एंबुलेंस सेवाओं का बुरा हाल है। मेंटीनेंस के अभाव में कई एंबुलेंस वाहन धक्काप्लेट हैं। किसी में पर्याप्त दवाएं नहीं हैं तो कोई स्टार्ट में खासा समय ले लेती है। फोन करने पर आश्वासन के बाद भी एंबुलेंस न पहुंचने की शिकायतें आम हैं। धरातल पर स्थिति यह है कि दूसरों को आक्सीजन देने वाली एंबुलेंस खुद आक्सीजन मांग रही हैं।
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ढाई वर्ष पहले प्रदेश में शुरू हुई डायल 102 एंबुलेंस सेवा के तहत जिले को 41 एंबुलेंस मुहैया कराई गई थी। डायल 102 एंबुलेंस को लाइफ सेविंग ड्रग्स व मेडिकल टीम के साथ लैस कर स्वास्थ्य विभाग के हवाले किया गया था। एंबुलेंस सेवा की शुरुआत के साथ जिले में मरीजों ने इसका भरपूर फायदा उठाया लेकिन एक वर्ष का समय गुजरते ही अब यह सेवा बदहाल होने लगी। कहीं समय से एंबुलेंस पहुंच नहीं रही हैं तो कहीं अस्पताल से घर जाने के लिए मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  जिले में मौजूदा समय कुल कुल 26, 108 एंबुलेंस संचालित हैं। इसमें तीन जिला अस्पताल, सोलह सीएचसी के अलावा एक आजाद नगर चौराहा, एक बारासगवर थाना, एक दही चौकी, एक तकिया चौराहा सफीपुर, एक चकलवंशी चौराहा, एक नानामऊ घाट, एक लखनऊ बाईपास पर तैनात की गई हैं। कई एंबुलेंसों में न तो बीटाडीन लोशन है और न ही लाइफ सेविंग इंजेक्शन। इसके अलावा अन्य कई कमियां हैं।  
केस-1
हसनगंज तहसील क्षेत्र के गांव जंगलेमऊ में गर्भवती महिला गुड़िया पत्नी भीमा के परिजनों ने प्रसव पीड़ा होने पर 102 एंबुलेंस को सूचना दी। वहां से एंबुलेंस भेजने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन बाद भी बताया गया कि तकनीकी खराबी होने के कारण एंबुलेंस नही आ सकती। बाद में परिजन महिला को किराए के वाहन से अस्पताल लेकर गए  
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केस-2
हसनगंज निवासी गर्भवती महिला काजल पत्नी अमित सिंह को प्रसव पीड़ा होने पर 102 एंबुलेंस पर सूचना दी गई। जब काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंची तो पति ने निजी वाहन से लाकर सीएचसी में भर्ती कराया। अमित ने बताया कि फोन करने पर एंबुलेंस पहुंचने की बात कही गई थी, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। प्रसव पीड़ा अधिक होने पर मजबूरन निजी वाहन से लाना पड़ा।  

102 एंबुलेंस में यह होनी चाहिए सुविधाएं
गाइड लाइन के मुताबिक 102 एंबुलेंस में गर्भवास्था संबंधी सभी मेडिसिन। बेचैनी बढ़ने की स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडर। सीज फायर। गर्भवती महिलाओं के लिए एलसीडी। इमरजेंसी टार्च। स्कोप स्ट्रेचर व अन्य दवाएं

108 एंबुलेंस में यह होनी चाहिए दवाएं
नियमानुसार 108 एंबुलेंस में -बर्न स्पे। पेन किलर दवाईयां, जलने व अत्यधिक खून बहने की स्थिति में तत्काल इलाज मुहैया कराने के लिए बीटाडीन लोशन। कॉटन पैक। प्राथमिक स्तर पर लाइफ सेविंग इंजेक्शन। मॉस्क। वीगो। डायरिया व लू पीड़ित मरीजों को बचाने के लिए ग्लूकोज से साथ, मेट्रोजिल सहित 17 अन्य दवाएं।

102 व 108 स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभारी बोले
जिले में दोनों एंबुलेंसों में लगभग सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यदि किसी मरीज को फोन करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंच रही है तो वह इसी नंबर पर अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकता है। हसनगंज 102 एंबुलेंस पर उन्होंने बताया कि यहां दो गाड़ियां चल रही हैं। हो सकता है किसी एंबुलेंस में दिक्कत आई हो लेकिन मेरे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है। विराट कुमार श्रीवास्तव, एंबुलेंस प्रभारी।
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