उन्नाव रेलवे स्टेशन पर लोकमान्य तिलक ट्रेन पटरी से उतरने के बाद घटना स्थल पर मौजूद पुलिस बल व भीड़।
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ट्रेन की स्पीड धीमी हुई, अचानक जोरदार झटके के साथ ही धड़-धड़ की आवाज के बीच कोच में सवार कई यात्री एक दूसरे की बर्थ पर जा गिरे। सामान बिखरने के साथ ही चीख पुकार मच गई। कुछ जान जोखिम में डाल कोच से कूदकर भागने लगे। कुछ पल के लिए लगा कि एक झटके में सब खत्म हो गया। यह दर्द भरी जुबानी एलटीटी एक्सप्रेस के कोच नंबर बी-10 में सवार पुणे में आईटी इंजीनियर रंजीत मिश्र ने सुनाई। हादसे को करीब से देखने वाले रंजीत मंजर बताते हुए कांपे जा रहे थे। परिवार के साथ सकुशल सुरक्षित बचने पर परिवार ईश्वर का धन्यवाद देते थक नहीं रहा था।
रविवार दोपहर घड़ी में 1.38 बज रहा था तभी माडल रेलवे स्टेशन के डाउन ट्रैक प्लेटफार्म नंबर तीन से गुजर रही रनथ्रू साप्ताहिक एलटीटी एक्सप्रेस का बी-10 कोच आउटर से टकरा गया। चालक जब तक कुछ समझ पाता तब तक एक-एक कर ट्रेन की 11 बोगियां रेल पटरी से उतर गईं। इससे ट्रेन सवार यात्रियों में चीखनें की आवाजों के साथ ही अफरा तफरी का माहौल बन गया। कई यात्री लगेज छोड़ चलती ट्रेन से कूदकर जान बचाई। हादसे का मंजर देख ट्रेन सवार यात्रियों के साथ ही स्टेशन पर मौजूद यात्रियों की रूह कांप उठी। हादसे में सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए कोच बी-10 में सवार मुंबई जुहू निवासी रंजीत मिश्र पत्नी अल्पना मिश्रा, बच्चे हीरा व लवी के साथ लखनऊ के ममौरा एक रिश्तेदार के घर मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में रंजीत ने बताया कि बच्चों के साथ मस्ती कर रहा था और एकदम से भूकंप जैसा झटका लगा और कोच सवार यात्री एक दूसरे के बर्थ पर जा गिरे। जिसमें बेटी व पत्नी भी शामिल रहीं। यात्रियों में चीख पुकार मच गई। इस बीच कुछ लोग चलती ट्रेन से कूदने लगे। कुछ पल के लिए लगा कि सब बिखर गया। हादसे की जानकारी देते वक्त रंजीत के चेहरे पर मौत का खौफ साफ नजर आ रहा था। बच्चों को गले से लगाए रंजीत बोले कि कुछ हो जाता तो घर वालों को क्या जवाब देता। स्टेशन के वेटिंंग हाल में बुजुर्ग महिला काफी सहमी हुई बैठी थी।
कभी ट्रेन को देखती तो कभी यात्रियों को निहारे जा रही थी। महिला ने अपना नाम कंचन पुशकर्मा निवासी नासिक बताया। कोच नंबर ए-1 में सफर कर नासिक से लखनऊ के कपूरथला में रह रहे बेटे धीरज से मिलने जा रही थी। हादसे का जिक्र करते ही महिला बोली हे प्रभु जान बच गई। मुंबई से लखनऊ के गोमतीनगर आ रहीं श्रीमती आहूजा कंपकपाती हुई आवाज में बोलीं कि एक पल के लिए लगा सब खत्म हो गया। यही जुबानी कुरला से लखनऊ आ रहे अमोल सिंधे की रही। ट्रेन सवार यात्रियों में दहशत का मंजर साफ झलक रहा था।