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धूमधाम से मनाई गई गुरु गोविंद सिंह की जयंती

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शहर स्थित गुरुद्वारा में गुरूग्रंथ साहिब का पाठ करते ज्ञानी अमर सिंह। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। सिख धर्म के 10 वें और अंतिम गुरु गोबिंद सिंह की जयंती गुरुद्वारे में धूमधाम से मनाई गई। यहां शुभम सिंह के रागी जत्थे ने शबद कीर्तन के माध्यम से उनके गुणाें का बखान किया।
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गुरुद्वारे में ज्ञानी अमर सिंह ने शौर्य और साहस के प्रतीक गुरु गोबिंद सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को बिहार के पटना में हुआ। इस बार यह तिथि 2 जनवरी को पड़ी। गुरु गोबिंद सिंह एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ एक योद्धा, कवि और दार्शनिक भी थे। गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु गोबिंद सिंह के जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इन्होंने ही गुरु ग्रंथ साहिब को पूर्ण किया।
कहा जाता है कि गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंत की रक्षा के लिए कई बार मुगलों का सामना किया था। सिखों के लिए 5 चीजें बाल, कड़ा, कच्छा, कृपाण और कंघा धारण करने का आदेश गुरु गोबिंद सिंह ने ही दिया था। इन चीजों को पांच ककार भी कहा जाता है। जिन्हें धारण करना सभी सिखों के लिए अनिवार्य होता है। ज्ञानी अमर सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर्व समारोह 5 से 11 जनवरी तक आयोजित होंगे। प्रभात फेरी निकाली जाएगी। 12 जनवरी को जुलूस व 14 को गुरुद्वारे में कीर्तन व लंगर का आयोजन होगा।
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