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छह और गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण

Tue, 25 Aug 2015 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी योजना ट्रांसगंगा हाई टेक सिटी का उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (यूपीएसआईडीसी) विस्तार करने जा रहा है।
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1151 एकड़ में फैली इस सिटी के लिए देवारा कला समेत छह गांवों की 667.419 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। यूपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक मनोज सिंह ने जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल को पत्र लिखकर इस बाबत जानकारी भी उपलब्ध कराई है।
 
बीते 11 नवंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्रांसगंगा हाई टेक सिटी का शिलान्यास किया था। इसके बाद से विभाग ने यह काम तेजी से शुरू कराया और बीते दिनों सिटी के प्लाटों के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। सिटी को लेकर लोगों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए अब यूपीएसआईडीसी इसे विस्तार देने की तैयारी कर रहा है।
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इसके तहत दूसरे चरण में देवारा कला, पिपरी, बनी, मुश्तफापुर, खैरहा गैर एहतमाली व पिंडरखा की 667.419 हेक्टेयर भूमि को अधिग्रहित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग ने जमीन को किसानों की स्वीकृति से खरीदने की बात कही है।

यूपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक मनोज सिंह ने जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल को पत्र लिखकर इस बाबत जानकारी दी है। बता दें कि पहले चरण में शंकरपुर सराय, कन्हवापुर व मनभावना गांवों की 1151 एकड़ भूमि को इस योजना के तहत अधिग्रहित किया जा चुका है।


इन गांवों में होगा अधिग्रहण
ग्राम सभा का नाम              अधिग्रहित होने वाली भूमि का क्षेत्रफल
1- देवारा कला                            136.623
2-पिपरी                                    177.822
3-बनी                                      80.824
4-मुश्तफापुर                                54.70  
5-खैरहा गैर एहतमाली                    54.791
6-पिंडरखा                                 162.526


2003 में बनी थी ट्रांसगंगा हाई टेक सिटी योजना
उन्नाव। ट्रांस गंगा हाई टेक सिटी योजना 2003 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में सामने आई थी। लेकिन मुआवजा इतना कम था कि किसानों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली।

किसान नेता अजय अनमोल के मुताबिक 2007 में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने के बाद मुआवजे की दर 2.51 लाख रुपये से बढ़ाकर 5.51 लाख रुपये कर दी गई। लेकिन यूपीएसआईडीसी द्वारा योजना के तहत भूमि अधिग्रहण का काम 2012 तक नहीं किया और जब प्रदेश में दोबारा सपा सरकार बनी तो विभाग ने किसानों की जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया। इसके विरोध में किसान सड़क पर उतर आए।

किसानों का कहना था कि पूर्व में जो दरें लागू की गई थीं, वह आज के परिप्रेक्ष्य में काफी कम हैं। लिहाजा इसे बढ़ाया जाए।

किसानों के आंदोलन के बाद प्रदेश सरकार ने किसानों को प्रति बीघा 12.51 लाख रुपये मुआवजा, 6 प्रतिशत डेवलप लैंड, 50 हजार रुपये पुर्नवास के लिए व प्रत्येक किसान के एक व्यक्ति को इस जमीन पर स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाई में नौकरी देने की घोषणा की। इसके बाद किसान भूमि देने को राजी हुए।
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