बीघापुर कस्बा में स्थापित है प्राचीन शिवलिंग, गोदावरी तालाब की मिट्टी से बना है मंदिर
- शिवलिंग पर पड़ती है सूर्योदय की पहली किरण
अविनाश बाजपेयी
बीघापुर। नगर पंचायत बीघापुर स्थित बाबा गोदावलेश्वर धाम शिवभक्तों में आस्था व विश्वास का प्रतीक है। बाबा गोदावलेश्वर की भक्ति क्षेत्रीय लोगों में ही नहीं गैर जनपद के लोगों में भी अटूट श्रद्धा व आस्था है।
सावन के महीने में प्रतिदिन दर्शनार्थियों का तांता लग रहा है। वैसे तो साल के 12 महीने हजारों श्रद्धालु हर दिन पहुंचते है। लेकिन सावन के महीने व शिव रात्रि के अवसर पर लोगो में विशेष उत्साह रहता है।
शहर मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर बीघापुर कस्बा में गोदावलेश्वर मंदिर स्थित है। बाबा गोदावलेश्वर धाम की स्थापना घुमंतू जाति के बंजारों ने संवत् 986 में कराया था। मुख्य मंदिर गोदावरी तालाब की मिट्टी से बना है। मंदिर का गर्भगृह 10 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।
मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग का आकार द्वादश ज्योतिर्लिगों में शुमार महाराष्ट्र स्थित घृष्णेश्वर शिवलिंग की तरह है। मंदिर की बनावट बौद्धकालीन बनने वाले मठों की तरह है। गर्भगृह में प्रवेश करने के लिए अत्यंत छोटा प्रवेशद्वार है। मंदिर की बनावट इस प्रकार से है कि हर माह सूर्योदय की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है।
मंदिर में आने वाले भक्त बाबा गोदावलेश्वर के आगे जो भी मनोकामना रखते हैं उन्हें बाबा का आर्शीवाद प्राप्त होता है। शायद इसी कारण व्यापारी व क्षेत्र के सैकड़ों लोग प्रतिदिन सुबह बाबा की परिक्रमा व दर्शन करने के बाद ही अपनी दिनचर्या प्रारंभ करते हैं। चारों ओर वृक्षों से घिरा मंदिर व उसके आसपास बने लगभग आधा दर्जन मंदिर धाम की शोभा में चार चांद लगाए हुए हैं। सावन पर्व पर बाबा का दरबार शिवभक्तों में आस्था का केंद्र है। सावन के महीने में रुद्राभिषेक के अलावा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की धूम मची है।
ऐसे पहुंचे बाबा के दरबार
कस्बा बीघापुर के पूर्व दिशा में गोदावरी तट पर स्थित बाबा के धाम पहुंचने के लिए उन्नाव, कानपुर, रायबरेली लखनऊ की ओर से आने वाले लोग बस से बीघापुर बस स्टाप उतरकर नगर पंचायत के अंदर लगभग एक किमी सड़क मार्ग से मंदिर पहुंचेंगे। वहीं इलाहाबाद, रायबरेली, कानपुर की ट्रेनें भी बीघापुर रेलवे स्टेशन पहुंचती है। जिला उन्नाव मुख्यालय से दूरी लगभग 30 किमी है।
प्रचलित मान्यताएं
नगर के सैकड़ों परिवार प्रतिदिन सुबह बाबा की परिक्रमा व दर्शन करने के बाद ही अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं। लोगों के अनुसार शिवलिंग प्रात: पूजित मिलता है। वहीं मंदिर में स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलने के कारण लोगो में कौतूहल का विषय है। सुबह जब सूर्य की किरणें शिवलिंग पर पड़ती है तो इसका रंग भूरा नजर आता है। दोपहर में सुनहरा नीला और सायंकाल में काला दिखाई पड़ता है।
वंदन योजना से कराया गया सुंदरीकरण
नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि सुधीर बाजपेई ने बताया कि वंदन योजना से करीब दो करोड़ रुपये से मंदिर परिसर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया गया है। दर्शनार्थियों के बैठने के लिए सीट, लाइट व परिसर में टिनशेड लगाया गया है। पं. रविशंकर शुक्ल जन कल्याण समिति के प्रबंधक प्रमोद कुमार बाजपेई ने बताया कि सावन के आखिरी सोमवार को क्रांति माला कानपुर व शशिराज कमल रायबरेली के बीच जवाबी कीर्तन होगा।