उन्नाव। शहर में घरों से निकलने वाले सीवरेज (अपशिष्ट) से वायु व भूगर्भ जल प्रदूषण से शहरियों को निजात मिलेगी। जल निगम ने अमृत योजना के तहत 4.50 करोड़ की लागत से एफएसटीपी (अपशिष्ट शोधन संयंत्र) की स्थापना की है। इसमें साठ हजार घरों के सीवरेज का ट्रीटमेंट कर सिंचाई योग्य पानी और फसलों के लिए जैविक खाद बनाई जाएगी।
शहर में आवास विकास कालोनी के अलावा कहीं भी सीवर लाइन नहीं हैं। शहर की 1.80 लाख आबादी और साठ हजार मकान हैं। सभी मकानों में सीवर टैंक या सोख्ता पिट से काम चलाया जा रहा है।
टैंक भरने पर उसे नालियों में खुला बहाने या टैंकर के माध्यम से दूसरे स्थानों पर नालों में फेंका जाता है। अब इस इसका सुरक्षित तरीके से निस्तारण हो सकेगा। जल निगम ने शहर के पास हुसैन नगर गांव में 4.50 करोड़ की लागत से एफएसटीपी का निर्माण कराया है। इस प्लांट में घरों के सीवर टैंक के स्लज को शोधित करके सॉलिड (ठोस) व लिक्विड को अलग किया जाएगा। इस सॉलिड वेस्ट का जैविक खाद के रूप में खेती में प्रयोग किया जाएगा। लिक्विड वेस्ट का इस्तेमाल फसलों की सिंचाई में किया जा सकेगा। 11700 वर्ग मीटर में फैले इस प्लांट को बनाने में जल निगम को डेढ़ साल से अधिक समय लगा। जनवरी 2019 में शुरू निर्माण, अगस्त 2020 में पूरा हुआ है। 13 किलोवाट के इस प्लांट का संचालन सौर ऊर्जा से किया जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट में ही 25 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया गया है।
एफएसटीपी शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगा। इसके हस्तांतरण के लिए नगर पालिका को पत्र भी लिखा गया है। अभी तक हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। जिलाधिकारी ने पिछले दिनों प्लांट का निरीक्षण किया था। उन्होंने भी प्लांट को जल्द नगर पालिका को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए हैं। मोहित कुमार चक, अधिशासी अभियंता, जल निगम
शहर में प्रतिदिन 15 से 20 टैंकर सीवरेज निकाला जा रहा है। अब तक इसे बड़े नालों या शहर के बाहर फेंकने की मजबूरी थी। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता था। आसपास के लोगों को काफी परेशानी होती थी। अब इस सीवरेज को ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचाया जा रहा है। गृहस्वामी से प्रति टैंकर 1000 रुपये शुल्क जमा कराया जाता है। आरपी श्रीवास्तव, ईओ नगर पालिका
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