नगर के मोहल्ला सरांय स्थित करीब चार सौ वर्ष पुराना ऐतिहासिक मकबरा बीती रात अचानक भरभरा कर गिर गया। मकबरा परिसर में झोपड़ी डालकर गुजर बसर कर रहे करीब आधा दर्जन परिवारों के आधा सैकड़ा लोग बाल-बाल बच गए। हालांकि इन परिवारों की गृहस्थी मकबरे के मलबे में दब गई है।
नगर के वरिष्ठजनों का कहना है कि करीब चार सौ वर्ष पूर्व नगर के जमींदार फैज हुसैन की पुत्री जहांआरा की शादी सफीपुर के जमींदार के बेटे से तय हुई थी। शादी के ऐन मौके पर जहांआरा की अचानक मौत हो गई। इस मौत से फैज हुसैन को काफी सदमा पहुंचा था।
फैज हुसैन ने शादी में दिए जाने वाले दहेज को अपनी पुत्री की कब्र के बगल में दफन करवा दिया था। फिर इसी स्थान पर एक भव्य मकबरे का निर्माण करवाया। मकबरा मुगल शैली में बनवाया गया था और यह वास्तुकला का बेजोड़ नमूना था।
मकबरे की देखरेख न होने से यह अत्यंत जर्जर हो गया था। लेकिन मकबरा परिसर में करीब चार दशक से सलीम पुत्र शरीफ, मानू पुत्र कल्लू, अशफाक पुत्र बन्ने व रईस पुत्र मुस्तकीम सहित छह परिवार रहते थे।
शनिवार रात यह मकबरा अचानक भरभरा कर गिर गया। लेकिन मकबरे का मलबा इस तरह से गिरा की कोई भी जनहानि नहीं हुई। किंतु मकबरे के मलवे में इन परिवारों की हजारों रुपये की गृहस्थी दब गई।