लगातार दूसरे दिन भी कोहरे का कहर देखने को मिला। घने कोहरे के चलते सड़कों पर दृश्यता काफी कम हो गई। एक मीटर दूरी पर वाहन नजर नहीं आए। शहर से हाइवे तक वाहन रेंगते रहे। घने कोहरे के चलते ट्रेनों और बसों की भी चाल बिगड़ी। कानपुर-लखनऊ के बीच संचालित ट्रेनों के दोपहर तक न आने से बड़ी संख्या में यात्री इंतजार करते रहे। तीन बजे एक एलकेएम आने पर यात्रियों ने राहत महसूस की।
बुधवार के बाद गुरुवार को भी कोहरे का भीषण असर दिखा । रातभर भीषण कोहरे के बाद गुरुवार की सुबह भी घने के कोहरे के बीच हुई। चारो ओर अंधेरा छाया था और ठंड भी अपना रंग दिखा रही थी। लोग घरों से निकलने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे। जिसे भी बाहर निकलना पड़ा वह गर्म कपड़ों से लैस होकर ही निकला। वहीं शहर के भीतर व हाइवे पर चलने वाले वाहन भी रेंगकर ही चलते रहे। विजिबिलटी कम होने से लोगों को ड्राइविंग में काफी परेशानी हुई। वहीं लोग शहर के मुख्य चौराहों पर आग तापते रहे। दोपहर में करीब 12 बजे हल्की धूप दिखी तो लोगों के चेहरे खिल उठे और सड़कों पर भीड़ दिखी। वहीं शाम ठलते ही फिर से कोहरे ने अपना प्रकोप फिर से दिखाया और सड़कों पर सन्नाटा छा गया।
कोहरे ने ट्रेनों की भी रोकी रफ्तार
घने कोहरे के चलते गुरुवार को कानपुर-लखनऊ के बीच ट्रेनें दोपहर बाद तक स्टेशन नहीं पहुंची। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात यह रहे कि घने कोहरे के चलते यात्री प्लेटफार्म स्थित टीनशेड के नीचे सिकुड़कर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करते रहे। पूरे दिन के बाद दोपहर करीब तीन बजे एक एलकेएम उन्नाव पहुंची तो लोग इसमें भूसे की तरह भर गए। इसके बार स्टेशन पर भीड़ कुछ कम हुई। उधर, शाम होते ही कोहरे का कहर फिर शुरू हुआ तो हाईवे पर यातायात रेंगने लगा। हाईवे पर जाम की स्थिति बनने से चार पहिया वाहन शहर से निकलना शुरु हुए तो शहर के भीतर भी जाम की स्थिति बन गई। शाम 7 बजे से करीब 9 बजे तक शहर में भी यातायात रेंगता रहा।