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Unnao News: पोछा बनाने वाली फैक्टरी में आग, लाखों का नुकसान

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उन्नाव। मगरवारा स्थित पोछा बनाने वाली फैक्टरी में शुक्रवार को बिजली के तारों से निकली चिंगारी से आग लग गई। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। तीन दमकल से करीब दो घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। पीड़ित के अनुसार चालीस लाख का नुकसान हुआ है। हालांकि वह अधिकारियों को फायर एनओसी नहीं दिखा पाया।
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शुक्लागंज के बिंदानगर मोहल्ला निवासी रामप्रकाश सिंह मौजूदा समय में मगरवारा में घर बनाकर रह रहे हैं। वहीं पास में ही उनकी एमएस एक्सपोर्ट के नाम से पोछा बनाने की कंपनी है। शुक्रवार सुबह 9:30 बजे कंपनी में श्रमिक काम कर रहे थे। अचानक तार से चिंगारी निकली और वहां रखे कच्चे माल और सूती के कपड़े पर गिर गई। पास में मशीन में डालने वाला तेल सहित अन्य सामान रखा होने से आग का दायरा बढ़ गया।
श्रमिकों ने सबमर्सिबल से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता मिलती नहीं मिली। आग भड़कते देख सभी भाग कर निकले। पुलिस और अग्निशमन केंद्र को सूचना दी गई। कुछ ही देर में अग्निशमन अधिकारी शिवराम यादव एक दमकल के साथ पहुंचे। तेज आग देख दो और दमकल बुलाई गईं। दो घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका।
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फैक्टरी मालिक रामप्रकाश सिंह ने बताया कि सूती कपड़े व पोछा में लगने वाले प्लास्टिक के डंडे सहित अन्य सामान जला है। उनके मुताबिक करीब 40 लाख का नुकसान हुआ है।
अग्निशमन अधिकारी शिवराम यादव ने बताया कि आग पर तो काबू पा लिया गया था। नुकसान का आकलन अभी नहीं किया गया है। घटना शाॅर्ट शर्किट होने के अनुमान है। इसकी जांच की जाएगी। फैक्टरी की फायर एनओसी भी नहीं मिली है।

चारों ओर से फैक्टरी बंद होने से नहीं निकल पाईं लपटें
पोछा बनाने वाले जिस फैक्टरी में आग लगी वह चारो ओर से बंद थी, इससे आग की लपटें उसी में घूमती रहीं और सामान जलता रहा, समय रहते दमकल पहुंच जाने से चारो ओर पानी की बौछारे शुरू हो गईं, इससे लपट बाहर नहीं आ पाई। अगर बाहर निकल आती तो आसपास रहने वाले लोगों के घरों तक आग फैल सकती थी। गनीमत रही कि ऐसा नहीं हुआ और ऐसा कोई सामान नहीं था, जिससे धमाका जैसा होता, अन्यथा स्थितियां बेकाबू हो सकती थीं।

करीब आठ साल पहले भी फैक्टरी में लगी थी आग
पोछा बनाने वाली यह फैक्टरी पुरानी है, करीब आठ साल पहले भी इस फैैक्टरी में इसी तरह से आग लगी थी और सब सामान जल गया था। कुछ महीने रुकने के बाद दोबारा काम शुरू हुआ था। चर्चा है कि उस समय भी फैक्टरी में फायर एनओसी नहीं मिली थी।
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