उन्नाव। रनिंग ट्रेन में एफआईआर लिखने की शुरुआत 15 फरवरी से होगी। इसके लिए जीआरपी सिपाहियों को लखनऊ में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एस्कार्ट में चलने वाले कई सिपाही प्रशिक्षित भी किए जा चुके हैं। इसके लागू हो जाने के बाद यात्रियों को किसी भी प्रकार की घटना होने पर जीआरपी थाने पहुंच रिपोर्ट लिखाने का झंझट नहीं रहेगा।
अभी तक यात्रा के दौरान किसी यात्री के साथ कोई घटना घट जाती है तो उस यात्री को एफआईआर लिखाने के लिए ट्रेन से उतर कर जीआरपी थाने जाना पड़ता है। इस दौरान उसकी ट्रेन छूट जाती है। 15 फरवरी से इसमें बदलाव होने जा रहा है।
जीआरपी ने जो नया सिस्टम तैयार किया है उसके मुताबिक, यदि किसी यात्री का ट्रेन के सफर के दौरान कोई सामान चोरी हो जाता है या उसके साथ कोई घटना होती है तो इसकी एफआईआर के लिए उसे ट्रेन से नहीं उतरना पड़ेगा। यात्री घटना की सूचना ट्रेन में चल रहे एस्कार्ट को देगा।
इसके बाद एस्कार्ट में मौजूद सिपाही एफआईआर दर्ज करेगा। यह एफआईआर तीन प्रतियों में होगी। जिसमें से एक प्रति पीड़ित को मिलेगी। दूसरी प्रति ट्रेन में चल रहा एस्कार्ट अपने पास रखेगा और तीसरी प्रति अगले स्टेशन पर स्थित जीआरपी थाने में देगा। रनिंग ट्रेन में एफआईआर लिखने का काम 15 फरवरी से शुरू हो जाएगा। इसके लिए जीआरपी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ट्रेन में एफआईआर दर्ज होने के बाद यात्रा के दौरान न तो यात्री को ट्रेन से नीचे उतरना पड़ेगा और न ही उसकी ट्रेन छूटेगी।