नवाबगंज विकासखंड के नानाटीकुर गांव के पास से गुजरी भौली माइनर की खांदी दस दिन पहले कटी थी जिसे आज तक बांधा नहीं जा सका है। खांदी कटने से आसपास दर्जनों खेतों में पानी भरा है। स्थिति यह है कि लगातार सूचना के बाद भी नहर विभाग का कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। कुछ दिन पूर्व किसानों ने निजी साधनों से किसी तरह से खांदी बाधी थी, लेकिन बहाव तेज होने और आगे पानी न निकल पाने से खांदी दोबारा कट गई। सैकड़ों बीघे जलमग्न फसल सड़ रही है, जिला प्रशासन से लेकर नहर (सिंचाई) विभाग के अफसर सो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक करीब दस दिन पहले नानाटीकुर गांव के निकट से गुजरी भौली माइनर में खांदी कट गई थी। पानी आसपास के खेतों में भर गया था। ग्रामीणों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी थी। किसी के न पहुंचने पर ग्रामीणों ने किसी तरह खुद के संसाधनों से खांदी बांध दी थी। ग्रामीणों न बताया कि माइनर सफाई में पैसे का बंदरबांट और खानापूरी होने से पानी आगे नहीं बह पाया और ओवरफ्लो हो गया। जिससे उसी जगह फिर से खांदी कट गई। अबकी बहाव तेज होने से दर्जनों खेतों में पानी भर गया। इससे लोगों के खेतों में बोई गई फसल पूरी तरह से जलमगभन हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हफ्ते भर से खेतों में पानी भरा होने से फसलें सड़ने लगी हैं। बताते चलें कि भौली माइनर की खांदी कटने का मामला पहला नहीं है। इससे पहले असोहा, बिछिया, हसनगंज, सफीपुर, गंजमुरादाबाद ब्लाक के सैकड़ों गांवों के नजदीक की खांदी कटने से किसानों की हजारों बीघे फसलें नष्ट हो चुकी हैं। बिछिया और सफीपुर में तो गांवों के अंदर तक पानी पहुंच गया था। असोहा में भी कई दिन तक खांदी कटी रही और खेत जलमगभन रहे, लेकिन अधिकारियों ने मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई। डीएम सौम्या अग्रवाल ने फोन पर खुद इस मामले को दिखवाने और विभागीय अफसरों को मौके पर भेजने की बात कही थी लेकिन यह केवल बयानबाजी तक ही सीमित रहा।
किसान बोले हमारी चिंता किसी को नहीं
नानाटीकुर गांव के कमलेश, अयोध्या प्रसाद त्रिवेदी, पिंकू आदि ने कहा कि कमोबेश हर राजनीतिक दल खुद को किसानों का हितैषी बताता है। हर सरकार अन्नदाताओं के लिए बड़ी-बड़ी योजनाओं को लाने का दावा करती है लेकिन जब किसानों पर मुसीबतें आती हैं तो कोई भी सामने दिखाई नहीं देता है। जिले के कई ब्लाकों के किसान खांदी कटने से तबाह हुई फसलों का दंश झेल रहे हैं लेकिन न तो जिलाधिकारी ने मौके पर जाकर उनका दर्द बांटने की जहमत उठाई और ना ही किसी जनप्रतिनिधि ने।