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शिक्षा विभागः कहने को सजा, असल में मजा

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सफीपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में निलंबन सजा नहीं बल्कि फायदे का सौदा है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योकि निलंबन होने के बाद शिक्षकों को दूरी कम कर पास के ब्लॉक में बहाली देने के खुलासे हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला आजकल खूब चर्चा में हैं।
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सफीपुर ब्लॉक के स्कूल में बहाल किए गए शिक्षक संजीव शंखवार प्राथमिक शिक्षक संघ में पदाधिकारी भी हैं। इसके पहले वह औरास ब्लॉक के गोविंदापुर प्राथमिक स्कूल में प्रधान शिक्षक के पद पर तैनात थे। 7 सितंबर 2020 को शिक्षक की पत्नी ने ही कई आरोप लगाए थे। आरोप सिद्ध होने पर बीएसए ने प्रधान शिक्षक को निलंबित कर सुमेरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सिरियापुर में संबद्ध कर दिया था। शिक्षक के घर से स्कूल की दूरी 120 किलो मीटर से अधिक थी। बाद में उन्हें सफीपुर ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल रायपुर मुड़हा में संबद्ध कर दिया गया। तीन महीने वहीं रखने के बाद उसी स्कूल में दो दिन पहले बहाल कर दिया गया। शिक्षक की घर से इस स्कूल की दूरी 68 किलोमीटर कम हो गई। इसके पहले सिकंदरपुर सरोसी ब्लॉक के शिक्षक के साथ भी ऐसा ही हो चुका है।
बिछिया ब्लॉक के हुसैनगर के सरकारी स्कूल में शिक्षिका से परेशान शिक्षक ने विभागीय अधिकारियों से किसी दूसरे स्कूल में भेजने की गुहार लगाई थी। तब उसे ट्रांसफर नीति का हवाला देकर उसी स्कूल में रहने को कहा गया था। बाद में उसी शिक्षक पर शिक्षिका ने दोबारा आरोप लगाए और उसे जेल जाना पड़ा था।
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बीएसए प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि शिक्षक संजीव की बहाली सफीपुर ब्लॉक में हुई है। पहले सुमेरपुर फिर सफीपुर ब्लॉक में बहाली करने के सवाल पर वह चुप्पी साध गए।
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