शहर के छोटा चौराहा के पास गुरुवार को छुट्टा मवेशियों का झुंड खड़ा था। अचानक दो साड़ आपस में लड़ गए। रोड पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग इधर-उधर भागने लगे। तभी कुछ स्कूली बच्चे वहां से निकल रहे थे, जानवरों ने बच्चों को दौड़ा लिया। बच्चे भी भागने लगे। कुछ बच्चे दौड़ने में गिर गए और उन्हें हल्की चोटें भी आ गईं। यह एक बानगी भर थी ऐसी घटनाएं शहर में रोजाना हो रही हैं। स्थानीय लोगों, स्वयं सेवी संगठनों की ओर से लगातार छुट्टा मवेशियों के खिलाफ अभियान चलाए जाने की मांग के बाद भी पालिका प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
शहर में आवारा जानवरों की धमाचौकड़ी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जगह-जगह पर इसका विरोध होने और समाजसेवियों की ओर से इसे लेकर धरना प्रदर्शन तक करने के बाद भी आवारा जानवरों में कमी नहीं आई है। धरने को समाप्त करने के लिए प्रशासनिक अफसरों ने छुट्टा जानवरों को पकड़ने व अभियान चलाने ते आदेश तो दे दिए, लेकिन यह आदेश सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गए। पखवारे भर पूर्व समाजसेवी अखिलेश अवस्थी ने आवारा जानवरों की बढ़ती संख्या व इसकी रोकथाम न होने को लेकर धरना भी दिया था। उनके साथ स्वयंसेवी संगठन व जन प्रतिनिधि भी आए थे। मामले को तूल पकड़ते देखकर पालिका के अधिकारियों ने यह आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था कि आवारा जानवरों व ऐसे पशुपालकों, जिन्होंने अपने जानवरों को खुले में छोड़ा रखा है, उनके खिलाफ जल्द अभियान चलाया जाएगा। आश्वासन देते के साथ ही लिखित आदेश भी जारी किए थे। लेकिन यह आदेश अभी भी कागजों में ही सिमट कर रह गया है ।
कांजीहाउस में जानवर व थाने में होंगे पशुपालक
आवारा जानवरों को लेकर सर्वे किया जा रहा है कि कितने जानवर आवारा हैं और कितने ऐसे हैं जिन्हें पशुपालकों ने खुला छोड़ दिया है। सर्वे के बाद आवारा जानवरों को तो कांजी हाउस भेजा जाएगा और जानवरों को खुले में छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर करवाकर उन्हें थाने पहुंचाया जाएगा। उमेश कुमार मिश्र, ईओ, नगर पालिका-उन्नाव।