हाल यह है कि अभी तक किसी को भी इस अत्याधुनिक सुविधा का लाभ नहीं मिला। डॉक्टर कमजोर व बीमार बच्चों को पहले की तरह ही कानपुर व लखनऊ रेफर कर रहे हैं। अपर निदेशक स्वास्थ्य (एडी हेल्थ) डॉ. मिथलेश चतुर्वेदी के निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ। यहां तक कि एडी को जिला अस्पताल में जन्मे कमजोर व बीमार बच्चों की रिपोर्ट भी नहीं दे पाए। एडी से सीएमएस ने यूनिट में डॉक्टरों की कमी की बात कही। इस पर उन्होंने सुधार के निर्देश दिए। इसके पहले उन्होंने नवाबगंज सीएचसी का निरीक्षण किया।
एडी हेल्थ डॉ. मिथलेश चतुर्वेदी गुरुवार दोपहर जिला अस्पताल पहुंची। उन्होंने कुपोषित बच्चों के लिए बनाई गए न्यू सिक बॉर्न केयर यूनिट का निरीक्षण किया। फरवरी में संचालित यूनिट में एडी को उपकरण तो मिले लेकिन कुपोषित बच्चे एक भी नहीं मिले। सीएमएस से भर्ती कुपोषित बच्चों की जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में हुए कुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया है। इस पर एडी ने सीएमएस से भर्ती बच्चों की रिपोर्ट बुक (बच्चाें के भर्ती होने व उनका ट्रीटमेंट करने) दिखाने के लिए कहा। रिपोर्ट बुक मांगने पर सीएमएस के साथ-साथ मौजूद स्टाफ बगलें झांकने लगा। स्टाफ नर्स ने रिपोर्ट बुक न बनाए जाने की बात कही। एडी ने निर्देश दिए कि दोबारा ऐसी गलती नहीं मिलनी चाहिए। जिन बच्चों को भर्ती किया जाए उनकी रिपोर्ट बुक बनाई जाए नहीं तो कार्रवाई की जाएगी। साफ-सफाई पर निर्देश दिए कि जिन कूड़ा उठाने वाली जो कंपनियां काम न कर रही हों उनका टेंडर निरस्त किया जाए। काम करने वाली कूड़ा कंपनियों का ही टेंडर आगे बढ़ाया जाए।
तीनों शिफ्ट में खुली होनी चाहिए बॉर्न केयर यूनिट
कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए संचालित की गई न्यू सिक बॉर्न केयर यूनिट का संचालन तीन शिफ्टों में होना चाहिए। यूनिट के संचालन के लिए चार संविदा डॉक्टरों की तैनाती किए जाने के आदेश है। यहां अभी एक ही पद भरा हुआ है। तीन पदों के लिए विज्ञापन निकालकर उनकी भर्ती की जाए। फिलहाल जब तक भर्ती नहीं होती तब तक जिला अस्पताल के ही डॉ. की मदद लेकर एसएनसीयू का संचालन चौबीस घंटे किया जाए।
सीएचसी प्रभारी व फार्मेसिस्ट को दस दिन का अल्टीमेटम
नवाबगंज। सहायक निदेशक स्वास्थ्य डॉ. मिथलेश चतुर्वेदी को सीएचसी में निरीक्षण के दौरान ढेरों कमियां मिलीं। सीएचसी परिसर में गंदगी मिलने के साथ ही दवाओं का रख-रखाव ठीक नहीं मिला। इतना ही नहीं जो दवाएं स्टोर में मिलीं उनमें अस्पताल की मोहर तक नहीं लगी थी। फार्मेसिस्ट अखिलेश विक्रम से जानकारी ली तो पता चला कि मोहर लगने से छूट गया है। इस पर उन्होंने फार्मेसिस्ट को फटकार लगाई और निदेश दिए कि दस दिन में दवाआें के रख-रखाव में सुधार करें, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी। गंदगी मिलने पर सीएचसी प्रभारी अखिलेश विक्रम को भी फटकारा। उसके बाद उन्होंने आई कार्यालय देखा। यहां मुफ्त चश्मा वितरण की जानकारी ली। अधीक्षक ने बताया कि 141 चश्मे मिले थे। इसमें 51 बच्चों के लिए व 90 अन्य मरीजों के लिए बांट दिए गए।