उन्नाव। पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी हत्याकांड में करीब चार साल से जेल में बंद दिव्या अवस्थी को हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में जमानत दे दी है। मालूम हो कि 18 फरवरी को हत्या के मुकदमे जमानत मिल चुकी है।
शुक्लागंज निवासी पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी की 19 जून 2020 को उन्नाव से वापस आते समय शुक्लागंज रोड पर सहजनी चौराहे के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में शुक्लागंज निवासी कन्हैया अवस्थी, उनकी पत्नी दिव्या अवस्थी सहित 17 लोग नामजद थे। मुकदमे में 10 लोगों की जमानत हो चुकी है। जिला प्रशासन ने गैंगस्टर में निरुद्ध करने के बाद दिव्या अवस्थी की करीब 20 करोड़ की संपत्ति भी कुर्क की थी।
छह दिसंबर को दिव्या के पति कन्हैया अवस्थी की जेल में हालत बिगड़ने के बाद लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पिछले दिनों 18 फरवरी को हत्या के मुकदमे में जमानत के बाद उच्च न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में शुक्रवार को जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश पंकज भाटिया ने उन्हें सशर्त जमानत दी है। जमानत संबंधी प्रपत्रों की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह जेल से बाहर आ सकेंगी।
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आबकारी अधिनियम में दोषियों को एक साल की सजा
उन्नाव। सदर कोतवाली पुलिस ने 24 फरवरी 2015 को बनकटा निवासी छोटेलाल व शिवबरन को 200 लीटर मिलावटी शराब के साथ पकड़ा था। विवेचक तत्कालीन उपनिरीक्षक महेश चंद्र ने नौ जुलाई 2015 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक के न्यायाधीश ने दोषियों को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। (संवाद)
धारदार हथियार से चोट पहुंचाने के दोषी को सजा
उन्नाव। माखी थाना पुलिस ने 19 जनवरी 2003 को बिरसिंहपुर निवासी रवींद्र कुमार पर मारपीट, गाली-गलौज व धारदार हथियार से हमला कर चोट पहुंचाने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। मुकदमे के विवेचक तत्कालीन एचसीपी एसके द्विवेदी ने 21 मार्च 2003 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया थ। शुक्रवार को कोर्ट ने रवींद्र को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास व तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। (संवाद)
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चोरी के दोषी को एक साल की सजा
उन्नाव। गंगाघाट पुलिस ने 28 मार्च 1998 को क्षेत्र के सीताराम कालोनी निवासी विनोद धानुक पर विद्युत तार चोरी करने की रिपोर्ट दर्ज की थी। मुकदमे के विवेचक तत्कालीन उपनिरीक्षक लल्लू दुबे ने आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य इकट्ठा कर आठ अप्रैल 2003 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। मुकदमा लंबे समय से एसीजेएम प्रथम न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को मुकदमे की अंतिम सुनवाई में न्यायाधीश ने दोषी को एक साल के कारावास व तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। (संवाद)