मालती रावत ने कहा कि सपा नहीं छोड़ी। उन्हें हटाया गया। कार्रवाई से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। भाजपा से उन्हें ऑफर मिला था, जिसे ठुकरा दिया था। इसके बाद उनके डिप्टी कमिश्नर पति को सामने लाकर दबाव बनाया गया।
भाजपा कार्यालय जाने के बाद सपा की प्रत्याशिता गंवाने वाली मालती रावत ने बड़ा बयान देते हुए सत्तादल को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि उनके पति आयकर विभाग में डिप्टी कमिश्नर हैं। पति की नौकरी फंस गई थी, इसलिए उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।
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सपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में उन्नाव के बिछिया तृतीय से जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं मालती रावत को पार्टी ने अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया था। उन्होंने 26 जून को नामांकन भी किया था। नाम वापसी के दिन 29 जून को मालती रावत ने खुद भाजपा कार्यालय जाने की बात स्वीकार की थी।
इसके बाद सपा ने उनकी प्रत्याशिता रद्द कर दी थी और उनको सपा महिला सभा जिलाध्यक्ष पद से भी मुक्त कर दिया था। इसके बाद मालती रावत ने दूसरे दिन खुद ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देते हुए चुनाव न लड़ने का एलान किया था।
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शनिवार को वह बतौर सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंची थीं। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने सपा नहीं छोड़ी। उन्हें हटाया गया। कार्रवाई से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। भाजपा से उन्हें ऑफर मिला था, जिसे ठुकरा दिया था।
इसके बाद उनके डिप्टी कमिश्नर पति को सामने लाकर दबाव बनाया गया। पति की नौकरी फंस गई थी। उनके लिए पति की नौकरी से बढ़कर कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सपा के ऊपर कोई दाग नहीं लगाया। अरुण सिंह का समर्थन और सपा के अन्य सदस्यों को उनके पक्ष में वोटिंग करने के आरोपों को मालती रावत ने नकार दिया।