बरामदे में दलालों पर नजर रखने के लिए लगा कैमरा
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जिला अस्पताल में निगरानी के लिए एक साल पहले लगे सीसीटीवी कैमरे बंद हो गए हैं। शार्ट सर्किट से खराब हुए कैमरों को ठीक कराने में प्रदाता कंपनी हीलाहवाली कर रही है। वाहन चोरी , दलाल, चोर उचक्कों और चिकित्सा कर्मियों से मारपीट की घटनाओं पर नजर रखने के लिए लगे कैमरे शोपीस बनकर रह गए हैं।
जिला अस्पताल में एक लाख रुपये की लागत से आठ सीसीटीवी कैमरे अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए थे। इन सीसीटीवी कैमरों का पेमेंट स्वास्थ्य विभाग को करना था। एक साल बीतने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा पेमेंट नहीं कर पाया है। इस बीच सीसीटीवी कै मरे खराब हो गए। अस्पताल के मुख्य द्वार पर दो सीसीटीवी कैमरे वाहन चोरों पर नजर रखने के लिए लगाए गए थे।
इनके बंद होने की अस्पताल कर्मचारियों व दलालों को भी जानकारी है। इससे अस्पताल गेट के बाहर से अब तक लगभग पांच बाइकें उठ चुकी हैं। दलाल अस्पताल गेट से लेेकर वार्डों में घूम रहे हैं। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और डीएम को भी है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
अस्पताल में एक साल पहले आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे । यह शार्ट सर्किट से जल चुके हैं। इसकी जानकारी एनआईसी को देने के साथ ही डीएम को भी दे दी गई है।
डॉ. एसपी चौधरी, सीएमएस
लगभग एक लाख रुपये से आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। पेमेंट स्वास्थ्य विभाग को करना था। अभी तक पेमेंट नहीं हो पाया है। फिलहाल थोड़ा परेशान हूं। जल्द ही कैमरे सही कराऊंगा।
प्रशांत प्रधान, हाउस एंड सेफ्टी सर्विस मैनेजर