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जर्जर वाहनों से अपराध रोकने की चुनौती

Fri, 01 May 2015 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। जर्जर और धक्का-परेड वाहनों से पुलिस के सामने अपराध रोकने की चुनौती है। अपराधियों के पास लग्जरी वाहन और पुलिस के पास खटारा जीपें ह। बादमाश डेढ़-दो सौ सीसी पॉवर वाली बाइक पर सवार होकर सरेराह लूट की वारदातों को अंजाम देते हैं और पुलिस सौ सीसी की बाइक से उनका पीछा करने की हिम्मत तो जुटाती है मगर उनकी धूल तक नहीं पाती।
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जिले में पुलिस के पास 53 वाहन हैं इनमें सभी 19 थानों और कोतवाली की जीपें भी शामिल हैं। 34 एक्शन मोबाइल (हीरो हॉडा स्पलेंडर) बाइक हैं। वाहनों की कमी के चलते पवन मोबाइल की सेवा कई साल से बंद है। मानकों पर गौर किया जाए तो वाहनों की जिंदगी 15 वर्ष या छोटे वाहन की पौने दो लाख किलो मीटर तक और बड़े वाहनों की चार लाख किलोमीटर तक मानी जाती है। जिला पुलिस के पास उपलब्ध वाहनों में 22 इस मानक से काफी अधिक किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं बावजूद इसके वाहनों की कमी के चलते खटारा वाहनों से काम चलाने की मजबूरी है।

एक इंस्पेक्टर ने बताया कि रात के समय थाने की जीप से दबिश देने जाने की हिम्मत नहीं पड़ती। कई बार तो क्षेत्रीय लोगों से गाड़ी मांगकर ले जानी पड़ती है। कटरी क्षेत्र के एक थानाध्यक्ष ने बताया कि उन्हें जो जीप मिली है वह तो अक्सर बीच रास्ते धोखा दे देती है और उसे दूसरे वाहन से खींचकर थाने लाना पड़ता है।
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गाड़ी जर्जर न होती तो भागने का प्रयास न करते बंदी
उन्नाव। पिछले दिनों गाड़ी की छत तोड़कर चार बंदियों के भागने की घटना की जांच रिपोर्ट में किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही नहीं बल्कि वाहन की कंडम हालत ही कारण बताई गई है। जांच अधिकारी सीओ सिटी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि इस घटना में किसी पुलिस कर्मी का कोई दोष नहीं पाया गया है। बल्कि भागते ही चारों शातिर बंदियों को दबोचने वाले पुलिस कर्मी इनाम पाने के हकदार हैं। उन्होंने बताया कि अबतक जांच में पाया गया है कि न्यायालय की हवालात में इतनी जगह नहीं है कि सभी बंदियों को उनमें रखा जा सके। मजबूरन उन्हें बंदी वाहन में ही बैठाए रखना पड़ता है। बंदी वाहन की छत काफी जर्जर थी जो एक-दो घूंसे में ही टूट गई। सीओ सिटी ने बताया कि गाड़ी की मरम्मत और टीन बदलने में 94 हजार रुपये का खर्च आएगा। स्टीमेट पुलिस मुख्यालय को भेज दिया गया है। धन राशि मिलते ही मरम्मत कराई जाएगी।

जीप को महीने में 150 लीटर डीजल, बाइक को 20 लीटर पेट्रोल
उन्नाव। खटारा वाहन एक लीटर में बमुश्किल दस-बारह किलोमीटर चलते हैं और विभाग नए वाहन के माइलेज के हिसाब से बजट देता है। प्रत्येक थाने की जीप को हर महीने 150 लीटर डीजल दिया जाता है और बाइक (एक्शन मोबाइल) के लिए प्रति माह 20 लीटर पेट्रोल दिया जाता है।

पुर्जे न मिलने से क्रेन भी कंडम
उन्नाव। जाम की समस्या से निपटने के लिए पुलिस विभाग को मिली क्रेन चार साल में ही कंडम हो गई। एसआईएमटी प्रमोद कुमार ने बताया कि पुर्जे न मिलने से क्रेन नहीं चल पा रही है। उनके मुताबिक एक टाटा 207, एक जिप्सी और एक क्वालिस पूरी तरह कंडम हैं।

इन थानों की जीप खटारा
उन्नाव। पुलिस लाइन के अधिकारियों के मुताबिक मौरावां, असोहा, सफीपुर, गंगाघाट और अचलगंज थानों की पुलिस जीप बेहद जर्जर हो चुकी हैं। लेकिन वाहनों की कमी के चलते उन्हीं से काम चलाने की मजबूरी है।

की गई वाहन और बजट की मांग
उन्नाव। सीओ पुलिस लाइन सर्वेश मिश्रा ने बताया कि वाहनों की कमी दूर करने के लिए पुलिस हेड क्वार्टर से नए वाहनों और पुराने वाहनों की मरम्मत कराने के लिए बजट की मांग की गई है।
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