उन्नाव। ओलावृष्टि व बारिश से तबाह हो चुके किसानों को एक और झटका लगा है। इफ्को ने डीएपी के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी है। डीएपी की प्रति बोरी के रेट में 50 रुपये का इजाफा कर दिया गया है। हालांकि यूरिया के दामों में बढ़ोत्तरी न होने से किसानों को फौरी तौर पर कुछ राहत मिली है क्योंकि खरीफ सीजन में डीएपी की कम और यूरिया की मांग ज्यादा होती है।
1 अप्रैल 2015 से बढ़े हुए रेट लागू हो चुके हैं। खरीफ सीजन में डीएपी का जो नया स्टॉक आएगा उसमें डीएपी 1191 रुपये प्रति बोरी की दर से किसानों को मिलेगी। पिछले सीजन में डीएपी 1141 रुपये प्रति बोरी के रेट से किसानों ने खरीदी थी। इस बार प्रति बोरी पचास रुपये की वृद्धि ने किसानों को रोने पर मजबूर कर दिया है। राहत बस इतनी है कि यूरिया के दामों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
यूरिया सादी 333.50 रुपये और नीम कोटेड 348 रुपये प्रति बोरी ही किसानों को दी जाएगी। जानकारों की मानें तो प्रकृति की मार से पहले से ही बेहाल नजर आ रहे अन्नदाताओं को सरकार ने भी रुलाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। अभी पिछले दिनों ही डीजल के रेट में बढ़ोत्तरी हुई थी।
इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ता है। इसको देखते हुए ग्रामीण इलाकों में सिंचाई व जुताई का काम करने वालों ने भी अपने रेट बढ़ा दिए। रबी के पीक सीजन में खाद के लिए खूब मारामारी मचती है। इसी कारण किसानों को ब्लैक तक में डीएपी खरीदनी पड़ती है। एक बोरी के लिए डेढ़-डेढ़ हजार रुपये तक देने पड़ते हैं।
सहायक निबंधक आरएस सेंगर ने बताया कि डीएपी 50 रुपये प्रति बोरी महंगी हो गई है। पुराना स्टॉक पुराने मूल्य पर ही दिया जाएगा। किसान बोरी पर अंकित मूल्य को देखकर ही भुगतान करें। यदि नई बोरी होगी तो नया रेट देना होगा। पुराने स्टॉक में डीएपी 1141 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से ही बेची जाएगी।