उन्नाव के नवाबगंज में कच्चा तेल बनाने वाली फैक्टरी के खली प्लांट में शनिवार सुबह आग लगने से अफरातफरी मच गई। घटना के समय फैक्टरी में सौ श्रमिक मौजूद थे। खली और चावल पॉलिस सहित अन्य ज्वलनशील सामग्री का भंडार होने से आग लगातार भड़कती रही। लखनऊ और कानपुर से भी दमकल बुलवाईं गईं। कुल नौ दमकलों को आग बुझाने में पांच घंटे लगे।
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आग ने मचाई तबाही
- फोटो : amar ujala
आग से एक करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। सोहरामऊ-सरौती लिंक मार्ग पर सीहाक इंटर प्राइजेज के नाम से कच्चा तेल बनाने की फैक्टरी है। फैक्टरी में चावल की कनकी व अन्य वनस्पतियों से कच्चा तेल तैयार किया जाता है। इसके बाद उसे अन्य रिफाइनरी को बेचा जाता है। पेराई में निकलने वाली खली से पशु आहार व पोल्ट्री फूड बनाया जाता है। शनिवार सुबह 10:30 बजे पशु आहार प्लांट में आग लग गई।
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आग बुझाते दमकल कर्मी
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ऊंची लपटें देख काम कर रहे सौ मजदूरों में भगदड़ मच गई। सभी प्लांट से बाहर भागे। फैक्टरी के मालिक गाजीपुर जिला निवासी ज्ञानेंद्र प्रधान ने दमकल व पुलिस को सूचना दी और खुद फैक्टरी पहुंचे। सोहरामऊ व अजगैन एसओ भी पहुंच गए। फैक्टरी के निजी संसाधनों से आग बुझाने की कोशिश शुरू की गई। कुछ ही देर में जिले के अलग- अलग क्षेत्रों की चार दमकल पहुंचीं। आग बेकाबू होते देख लखनऊ के आलमबाग, हजरतगंज, सरोजनीनगर और कानपुर के जाजमऊ सहित कुल नौ दमकलों को आग बुझाने में लगाया गया।
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गोदाम में लगी आग
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आग प्लांट के बाद कच्चे माल के गोदाम व भूसी के ढेर तक पहुंच गई। आग पर काबू पाने में दमकल कर्मियों को पांच घंटे लगे। सीओ आरके शुक्ल ने बताया कि आग से कोई जनहानि नहीं हुई है। फैक्ट्री मालिक ज्ञानेंद्र प्रधान ने एक करोड़ से अधिक के नुकसान की बात कही है। सीएफओ रमेश कुमार तिवारी ने बताया फैक्टरी की कनवेयर बेल्ट की मोटर जाम होने पर चिंगारी निकलने और उसी से आग लगने की आशंका जताई है।
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आग बुझाते दमकल कर्मी
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प्रोविजनल एनओसी पर ही संचालित
मुख्य अग्निशमन अधिकारी रमेश कुमार तिवारी ने बताया कि फैक्टरी 15 साल से संचालित है। अभी तक मालिक द्वारा अंतिम अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया। फैक्टरी निर्माण के दौरान प्रोविजनल एनओसी पर ही फैक्टरी का संचालन शुरू हो गया था। अभी तक प्रोविजन एनओसी पर ही फैक्टरी संचालित है।
फैक्टरी में सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं
अग्निशमन विभाग के मानकाें के अनुसार फैक्टरी में आग बुझाने के लिए पानी का डेढ़ लाख लीटर अंडर ग्राउंड टैंक, होज रील व हाइड्रेंट सिस्टम, 20 हजार लीटर का ओवरहेड टैंक, मैनुअली ऑपरेटेड अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक डिटेक्शन सिस्टम, स्प्रिंग कलर सिस्टम समेत अन्य उपकरण होना आवश्यक है। हालांकि फैक्टरी में फायर सिलिंडर के अलावा कुछ नहीं मिला। अग्निशमन कर्मियों के अनुसार सिंलिंडर भी जंग लगे थे। यह सभी उपकरण मौजूद होते तो आग पर जल्द काबू पाया जा सकता था।