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‘सत्संग से दूर होते मन के विकार’

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संत सम्मेलन में मौजूद रामस्वरूप ब्रम्हचारी व अन्य संतगण। - फोटो : UNNAO
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सफीपुर। बाबू भगवतीचरण वर्मा पार्क में तीन दिवसीय 68वें सनातन धर्म सम्मेलन का गुरुवार को पूजा-अर्चना के साथ शुभारंभ किया गया। दूर-दूराज से आए वक्ताओं ने सत्संग की महिमा पर प्रकाश डाला।
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धर्म सम्मेलन में फर्रुखाबाद से आए आचार्य धनंजय मिश्र ने कहा कि शरीर की गंदगी को दूर करने के लिए तो साधन सुलभ है पर रूप, रस, गंध व स्पर्श से उत्पन्न आंतरिक विकारों को दूर करना कठिन है। यदि इन विकारों को दूर करना है तो मनुष्य को सत्संग का सहारा लेना चाहिए। सत्संग विद्वानों के प्रवचन से प्राप्त होता है। विद्वान बताते हैं कि भक्ति भावना ही सर्वश्रेष्ठ है। भक्ति के ज्ञान रूपी जल में डुबकी लगाने से मन निर्मल हो जाता है। मन के निर्मल होने पर सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिल जाती है। भक्ति के द्वारा ही जीव फिर मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। आचार्य ऋ षभदेव मिश्र ने श्रीमद्भागवत को परमानंद दायिनी बताया।
कहा कि भक्त भगवान की आनंदमयी लीलाओं का श्रवण कर परमानंद की अनुभूति करता है। समारोह के अध्यक्ष संत रामस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि सत्संग सांसारिक माया मोह में फंसे लोगों को सही मार्ग दिखाता है जिससे मानव का जीवन पूर्णतया सफल हो जाता है। बताया कि सत्संग ऐसी औषधि है जिससे शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा मिलता है, साथ ही मृत्यु के बाद भी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। अध्यक्ष ने कोविड-19 के नियमों का पालन करने की भी अपील की। इसी प्रकार आचार्य पुरुषोत्तम, प्रहलाद, अभिषेक मिश्र आदि ने भी प्रवचन करके श्रोताओं में भक्ति भावना का संचार किया। इससे पहले सम्मेलन का शुभारंभ भगवान के स्वरूपों की पूजा अर्चना के साथ किया गया।
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