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नौ साल बाद चर्चा में माखी का भैंसकांड

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अमर उजाला ब्यूरो
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उन्नाव। माखी में नौ साल पहले बहुचर्चित भैंस कांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। घटना की पुन: विवेचना के बाद एंटी करप्शन टीम के हाथ कई अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं। ऐसे में घटना में शामिल रहे पूर्व एसओ ने आत्मसमर्पण के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी है। जिसकी सुनवाई 13 अगस्त को होगी।


माखी थाना में वर्ष 2009 में तैनात रहे एसओ अनिरुद्ध सिंह ने 350 भैंस बरामद की थी। सुपुर्दगी के नाम पर पुलिस ने कुछ लोगों के साथ मिलकर बड़ा खेल कर दिया था। बताया जा रहा है कि इस घटना में पुलिस ने बरामद हुई 350 भैंस गुपचुप तरीके से बेंच दी थी। मामला चर्चा में आते ही तत्कालीन एसपी पीके मिश्रा के निर्देश पर तत्कालीन सफीपुर सीओ पंकज पांडेय ने मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में शासन स्तर से प्रकरण एंटी करप्शन टीम को सौंप दी गई।
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इस दौरान कई साल से तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। अब एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण शाखा) ने मामले की फिर से विवेचना शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक एंटी करप्शन टीम को भैंसकांड में पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। जिसमें तत्कालीन एसओ अनिरुद्ध सिंह के अलावा एसआई रियाज अहमद, सिपाही वीर सिंह, त्रिभुवन नाथ, वीरेंद्र कुमार, होमगार्ड नन्हा सिंह, विजय कुमार को प्राथमिक जांच में दोषी पाया है। टीम अब आरोपियों को गिरफ्तार करने की रणनीति पर काम कर रही है। इस मामले में पूर्व एसओ अनिरुद्ध सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में आत्मसमर्पण के लिए अर्जी दाखिल की है। सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तारीख तय की है।

-भैंसकांड में शामिल पूर्व एसओ ने आत्मसमर्पण के लिए दी अर्जी
-एंटी करप्शन की टीम ने तत्कालीन एसओ सहित सात पुलिस कर्मियों को दोषी पाया
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