अकरमपुर चौराहा पर पूर्व में हुए बवाल की जांच करते एएसपी रायबरेली विश्वजीत श्रीवास्तव। संवाद
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उन्नाव। दो महीने पहले अकरमपुर में हुए बवाल की शुक्रवार को रायबरेली के एएसपी ने जांच की। उन्होंने घटना के दौरान मौजूद रहे कोतवाली के पुलिस कर्मियों, मृतक के परिजनों व घटनास्थल के आसपास मौजूद रहे लोगों के बयान लिए। पथराव के दौरान स्टूल व डलिया रखकर खुद का बचाव कर विभाग की किरकिरी कराने वाले पुलिस कर्मियों को बॉडी प्रोटेक्टर एलॉट थे या नहीं, इसकी भी पड़ताल की। तीन घंटे की जांच के बाद एएसपी लौट गए।
देवीखेड़ा गांव निवासी राजेश व उसके दोस्त की 15 जून को गांव के सामने सड़क हादसे में मौत हो गई थी। परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर उसी दिन जिला अस्पताल के सामने जाम लगाकर हंगामा किया। पुलिस के समझाने पर परिजन शांत हो गए। अगले दिन अकरमपुर तिराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया था। पुलिस जाम खुलवाने पहुंची तो उपद्रवियों ने पथराव कर दिया था। 18 पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। पथराव के दौरान खुद के बचाव में कुछ पुलिस कर्मियों ने सिर पर प्लास्टिक का स्टूल व डलिया रखकर अपना बचाव किया था। फोटो वायरल होने पर अगले दिन आईजी लक्ष्मी सिंह ने कोतवाल दिनेश चंद्र मिश्र, मगरवारा चौकी प्रभारी व फोटो में दिखने वाले दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया था। जांच एएसपी रायबरेली विश्वजीत श्रीवास्तव को सौंपी गई थी। शुक्रवार को एएसपी रायबरेली सदर कोतवाली पहुंचे और घटनावाले दिन मौजूद रहे पुलिस कर्मियों ने बिंदुवार जानकारी ली और उनके बयान भी दर्ज किए। वायरल फोटो में दिखने वाले पुलिस कर्मियों में एक का स्थानांतरण हरदोई होने व दूसरे के लंबी छुट्टी जाने पर बयान दर्ज नहीं हो सके।
मालखाना के दीवान ने अपने बयान में बताया कि घटना वाले दिन से पहले ही उन सिपाहियों को बॉडी प्रोटेक्टर एलॉट कर दिए गए थे जिन्होंने जान बचाने के लिए स्टूल व डलिया का सहारा लिया। कोतवाली से जांच के बाद एएसपी अकरमपुर पहुंचे और आसपास के दुकानदारों के बयान दर्ज किए। मृतक के परिजनों के घर जाकर भी उन्होंने उनका पक्ष सुना। एएसपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न तथ्यों पर जांच हुई है। अभी कुछ पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज नहीं हो पाए हैं। उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है।