उन्नाव। जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पताल ऑक्सजीन की किल्लत से जूझ रहे हैं। जिले के सभी अस्पताल ऑक्सीजन के लिए कानपुर और लखनऊ पर निर्भर हैं। हालत यह है कि ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वालों के यहां दो गुनी कीमत देने पर भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे होम आइसोलेट मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
जिले के कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए 18 ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर और 330 सिलिंडर हैं। लेकिन 36 घंटे के लिए ऑक्सीजन का बैकअप बनाए रखने के लिए 500 सिलिंडर की आवश्यकता और है।
कंस्ट्रेटर के अलावा जंबो सहित छोटे ऑक्सीजन सिलेंडरों की संख्या 320 है। लेकिन मांग को देखते हुए और सिलिंडरों की आवश्यकता है। वहीं प्रदेश सरकार
ने प्रदेश के कोविड सेंटरों में 36 घंटे के ऑक्सीजन बैकअप रखने के निर्देश जारी कर दिए है। सरकार के इस फरमान के बाद मेडिकल कालेज को 500 सिलिंडिरों की जरूरत पड़ेगी।
वर्तमान में कोविड अस्पताल बनाए गए हिस्से में 330 बेडों में कोविड मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इनमें आईसीयू के 30 बेडों में सेंट्रल सिस्टम से ऑक्सीजन दी जा रही हैं। जबकि 50 अन्य बेडों में अलग से सिलिंडर लगाकर मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है। वहीं 250 बेडों में भर्ती मरीजों के लिए 18 ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर व छोटे सिलिंडर हैं।
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24 घंटे के लिए ऑक्सीजन का रिजर्व स्टॉक : डीएम
डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं हुई है। अस्पताल में 24 घंटे के लिए ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक हमेशा रहता है। बताया कि कानपुर से ऑक्सीजन लाने के लिए 5 वाहन लगा रखे गए हैं। जैसे ही 25-30 सिलिंडर खाली होते हैं उन्हें गाड़ी में रखवाकर कानपुर रिफिलिंग के लिए भेज दिया जाता है। ऑक्सीजन आपूर्ति की हर घंटे मॉनीटिरिंग की जा रही है। ऑक्सीजन लेकर आ रहा वाहन हाईवे पर जाम में न फंसे इसके लिए पुलिस पेट्रोलिंग भी करती है। शनिवार को एक गाड़ी जाम में फंसी थी। तत्काल पुलिस ने कॉरीडोर बना कर वाहन को निकाला था।
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