तेलंगाना से पैदल चलकर सफीपुर पहुंचे युवक।
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सफ ीपुर(उन्नाव)। परिवार के पालन-पोषण के लिए 1215 किलोमीटर दूर तेलंगाना गए। मात्र पांच दिन ही रह पाए कि लॉकडाउन हो गया। कुछ समय बाद जमा पूंजी भी खर्च हो गई तो पेट भरने की मुश्किलें आ गईं। पत्नी ने मोहल्ले वालों से उधार लेकर चार हजार रुपये भेजे। मजबूरन पांच मई को पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। कहीं सवारी का साधन मिला तो कहीं फि र पैदल ही मीलों सफर किया। लगातार 10 दिन की यात्रा करने के बाद अपने घर सफीपुर पहुंचे।
कस्बे के मोहल्ला सराय सूबेदार निवासी अनिल कुमार पुत्र रामजीवन का विवाह पांच वर्ष पूर्व कंचन से हुआ था। तीन वर्ष की पुत्री राधिका और डेढ़ वर्ष के पुत्र कुंदन की जिम्मेदारियों का खर्च बढ़ा तो 17 मार्च को मजदूरी के लिए हैदराबाद (तेलंगाना) गए। मात्र चार दिन काम किया था कि पहले जनता कर्फ्यू और फिर उसके बाद लॉकडाउन लागू हो गया। धीरे-धीरे जेब के पैसे भी खत्म हो गए तो पत्नी कंचन ने मोहल्ले के लोगों से उधार लेकर चार हजार रुपये भेजे। उसके सहारे कुछ दिन कटे। धीरे-धीरे वह भी समाप्त हुए तो फाकाकशी की नौबत आ पहुंची। किसी तरह से चावल खाकर पेट भरा।
इसके बाद भी न लॉकडाउन खुला और ना ही नौकरी शुरू हुई तो मोहल्ले के ही प्रदीप पुत्र रामबाबू के साथ पैदल घर के लिए निकलना पड़ा। इस दौरान रास्ते में कई तरह की शारीरिक व मानसिक यातनाएं झेलीं। रास्ते में अंधेरा हुआ तो पास के रेलवे स्टेशन पर रात बिताने पहुंचे। यहां पर पुलिस ने डंडे पटककर भगा दिया। कहीं ट्रक तो कहीं लोडर से थोड़ी यात्रा की। हालांकि अधिकतर यात्रा पैदल ही करने को मजबूर होना पड़ा। अनिल व प्रदीप ने बताया कि परिवार के पोषण के लिए बाहर गए। खुद भी भुखमरी झेली और परिवार भी रोटी-रोटी को मोहताज हो गया। अब वह यहीं रहकर कुछ भी कर लेंगे लेकिन वापस परदेश नहीं जाएंगे।