उन्नाव। जिले का उद्योग जगत भी कोरोना के कहर से अछूता नहीं है। विभिन्न देशों के बीच हवाई सेवा ठप होने से चमड़ा उद्यमियों का 2000 करोड़ का माल जहां का तहां फंसा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग न होने से चमड़ा उत्पादकों ने श्रमिकों की बैठकी कर दी है। वहीं, विदेशों में पैकेट बंद मांस का निर्यात करने वाले स्लॉटर हाउसों ने भी मांग न होने से उत्पादन लगभग बंद कर दिया है। प्रतिदिन 8 करोड़ का उत्पादन करने वाले स्लॉटर हाउसों में मार्च महीने में प्रतिदिन महज 1 करोड़ का माल तैयार हो रहा है। घाटे से बचने के लिए अबतक 7 हजार दैनिक श्रमिकों की बैठकी कराई गई है।
माघ मेला में दो माह की बंदी के बाद उबरने की कोशिश कर रहे चमड़ा उद्योग को कोरोना वायरस चपेट में ले रहा है। औसतन हर महीने दो हजार करोड़ के कारोबार पर ब्रेक लग गया है। उन्नाव जिले के दही चौकी व बंथर औद्योगिक क्षेत्र की 120 उद्योगों का 1500 करोड़ का माल चाइना, श्रीलंका, बांगलादेश, वियतनाम, हांगकांग, फ्रांस सहित कई देशों के एयरपोर्ट पर फंसा है।
मीट निर्यात का भी बुराहाल है। 1000 हजार करोड़ के आर्डर निरस्त हो चुके है। वहीं जिले में संचालित 6 स्लॉटर हाउसों में प्रतिदिन 8 करोड़ का होने वाला उत्पादन 1 करोड़ में सिमट गया है।
मध्यम और लघु उद्योगों का भी बुरा हाल है। आईआईए (इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएसन) के अध्यक्ष जीएन मिश्रा ने बताया कि घरेलू और निर्यात कारोबार लगभग ठप है। बाजार में मांग नहीं है। दूसरे देशों और प्रदेशों से भी आर्डर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि 600 करोड़ के कारोबार में 50 फीसदी कमी हो गई है।
उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ के उन्नाव चेप्टर के अध्यक्ष मो. ताज आलम ने बताया कि एक महीने में ही चमड़ा उद्योग कम से 6 महीने पीछे चला गया है। निर्यात किया गया माल विभिन्न देशों में हवाई अड्डों पर फंसा है। कस्टम से अनापत्ति लेकर उसे खरीदने वाली फर्म तक पहुंचा नहीं पा रहे हैं। बताया कि चमड़ा उद्योग का घरेलू व्यापार भी महज 20 फीसदी ही रह गया है।
चमड़ा उद्योग संघ के उन्नाव चेप्टर के अध्यक्ष मो. ताज आलम।- फोटो : UNNAO