मौसम की मार से किसान उबरते नहीं दिख रहे हैं। पूर्व में रबी सीजन में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और खरीफ सीजन में पड़े सूखे से अन्नदाता पहले ही तगड़ा नुकसान उठा चुके हैं।
अब जनवरी के पहले सप्ताह में मौसम के गर्म हो जाने से रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं के उत्पादन में भी गिरावट की आशंका ने किसानों के माथे पर बल डाल दिए हैं।
जिले में इस बार 244509 हेक्टेअर में गेहूं की बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन मात्र 219390 हेक्टेअर में ही गेहूं की बुआई हो पाई है। कृषि विभाग ने इस बार 966 हजार मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
जिला कृषि अधिकारी यतींद्र सिंह के मुताबिक गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए कड़ाके की ठंड पड़नी बेहद जरूरी है।
वैसे गेहूं की फसल को तैयार होने में लगभग 90 से 100 दिन के बीच का समय लगता है, इसमें करीब एक माह यानि 30 दिन ठीकठाक ठंड पड़नी चाहिए। यदि इतने दिन कड़ाके की ठंड नहीं पड़ेगी तो इसका असर गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए मौसम का प्रभाव खास मायने रखता है।
इधर, जनवरी शुरू हो चुकी है। इस माह के पहले हफ्ते में जिस तरह से मौसम बदल गया है और कड़ाके की ठंड के बजाए हल्की गर्मी पड़ने लगी है, उससे तो गेहूं का उत्पादन गिरने की आशंका बढ़ गई है। मौसम के इस बदले रुख को देख किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
किसान कड़ाके की ठंड न पड़ने से परेशान नजर आने लगे हैं। हालांकि कृषि अधिकारी अभी उत्पादन गिरने की आशंका को नकार रहे हैं। उनका कहना है कि अभी जनवरी का पहला सप्ताह ही चल रहा है ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि उत्पादन गिर सकता है।
पिछले साल भी गिरा था गेहूं का उत्पादन- वर्ष 2015 में असमय की ओलावृष्टि व बारिश से गेहूं की पैदावार को तगड़ा नुकसान हुआ था। उस दौरान भी किसानों की फसलें तबाह हुई थीं। गेहूं का उत्पादन गिरकर आधा ही रह गया था।
पिछले वर्ष में लक्ष्य 800 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का था, लेकिन उत्पादन 488 हजार एमटी ही हुआ था।
वर्ष 2014 में मौसम के साथ देने से 736 हजार मीट्रिक टन गेहूं की बंपर पैदावार हुई थी। इसके अलावा दो खरीफ सीजनों में सूखा पड़ने से किसानों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में यदि रबी सीजन में भी मौसम की मार पड़ती है तो किसानों की आर्थिक रूप से कमर टूट सकती है।
अभी पड़ेगी कड़ाके की सर्दी-मौसम वैज्ञानिक- चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह की मानें तो अभी कड़ाके की सर्दी पड़ेगी।
इधर, पहले बारिश की संभावना बनी थी, लेकिन फिलहाल बारिश टल गई है। अब 15 जनवरी के बाद बारिश के संकेत बन रहे हैं। इसके बाद सर्दी बढ़ेगी और अच्छी खासी ठंड पड़ेगी। इससे लोगों को कड़ाके की ठंड से दो-चार होना पड़ेगा।