पाटन। गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास अक्तूबर माह में प्रस्तावित है। अधिकारी भूमि अधिग्रहण की कवायद में जुटे हुए हैं, लेकिन बीघापुर तहसील के राजस्व कर्मचारियों को डेढ़ सौ काश्तकार ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इससे तहसील क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य अभी पूरा नहीं हो सका है।
तहसील प्रशासन ने सभी राजस्व लेखपालों को लगाकर रजिस्ट्री के कार्य को जल्द पूरा कराने का प्रयास किया। काफी हद तक सफलता भी मिली लेकिन विभिन्न ग्राम पंचायतों के 150 काश्तकारों का पता नहीं चल पा रहा है। राजस्व अभिलेखों में इनके नाम 14 हेक्टेयर भूमि है। यूपीडा के नाम रजिस्ट्री के लिए इनकी तलाश कराई गई, लेकिन कहीं पता नहीं चला। इसके चलते गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य अटक रहा है। तहसीलदार दिलीप कुमार ने बताया कि योजना में भूमि अधिग्रहण के कई चरण होते हैं। पहले चरण में वार्ता के माध्यम से बिक्री को तैयार हुए काश्तकारों से तय मूल्य पर रजिस्ट्री करा ली गई है। कुछ गाटे विभिन्न मामलों को लेकर न्यायालय में विचाराधीन हैं। कुछ लोग ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। जानकारी में आया है कि वह अन्यत्र जाकर रहने लगे हैं। इस प्रकार के मामलों में सोशल इंपेक्ट कम्यूनिटी का गठन कर सर्वे व अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है।
गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास अक्तूबर में प्रस्तावित है। इसको देखते हुए शिलान्यास से पहले भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी करने की कवायद में यूपीडा के अधिकारी लगे हुए हैं। अभी सहमति के आधार पर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। यदि बाद में विशेष परिस्थितियां बनती हैं तो अनिवार्य अधिग्रहण की कार्रवाई भी की जा सकती है।
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